इस गांव में अभी भी मानवता जिंदा है, एकता का परिचय देती ये खबर जरूर पढ़े

ग्रामीणों ने एकमत होकर निराश्रृत महिला के मकान निर्माण में जुट गये और जब ढलाई की बारी आई तो ग्रामीणों ने श्रमदान करके ही महिला के मकान की छतढाल दी

 

By: ajay shrivastav

Published: 11 Sep 2017, 03:06 PM IST

कोण्डागांव- जो काम शिक्षित व मल्टीस्टोरी भवनों में रहने वाले लोग नहीं कर पाते वह जिला मुख्यालय के एक आदिवासी बाहुल्य इलाका ग्राम मडऩार के ग्रामीणों ने एकजुट का परिचय देते सरकारी योजना में श्रमदान कर एक निराश्रृत महिला का मकान बना डाला।

उसकी मजबूरी बन गई थी
दरअसल गांव की ही एक निराश्रृत महिला उचलीबाई 74 के पास रहने के लिए न तो मकान था और न ही उसके पास कोई जमीन ज्यजाद वो जैसे-तैसे कर अपना जीवन यापन कर रही थी। साल के 12 माह वह बारिश, गर्मी व ठंड से लड़ते हुये गुजारना उसकी मजबूरी बन गई थी।

पीएम आवास योजना के अंतर्गत
इसी बीच वर्ष 2016-17 में पीएम आवास योजना के अंतर्गत उसके नाम पर मकान बनाने की स्वीकृति तो मिली, लेकिन स्वीकृति के बाद काफी समय गुजर जाने के बाद भी जब महिला का मकान बनता न देख कलेक्टर समीर विश्नोई व सीईओ डॉ. संजय कन्नौजे, डिगेस पटेल ने पंचायत प्रतिनिधियों को समझाया।

अपनी रोजी भी नहीं ली
इसके बाद ग्रामीणों ने एकमत होकर निराश्रृत महिला के मकान निर्माण में जुट गये और जब ढलाई की बारी आई तो ग्रामीणों ने श्रमदान करके ही महिला के मकान की छतढाल दी और किसी ने उस दिन अपनी रोजी भी नहीं ली।

दिया मानवता का परिचय-
बड़े शहरों में भले ही यह देखने का न मिले कि लोग एक दूसरे से कितना आपसी व आत्मीय संबंध रखते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह देखने को मिलता हैं। जिसका परिचय ग्राम मड़ानार के ग्रामीणों ने कर दिखाया। ग्राम मड़ानार में साईड कार्य देख रहे उपयंत्री विरेंद्र साहू ने बताया कि मकान बनाने की स्वीकृति के बाद कुछ दिन तक तो पंचायत ने काम करवाया, लेकिन बाद में लेबर नहीं मिल पाने के चलते काम अटक गया था। इसके बाद उच्चधिकारियों के प्रयासों से ठंड से पहले अब निराश्रृत महिला कों एक पक्का मकान मिल जायेगा।

ajay shrivastav
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