चुनावी खर्च, गुटबाजी से बचने बनाई आपसी रणनीति और इसतरह चुनाव से पहले ही चुन ली गांव की सरकार

Panchayat Election: ग्रामीणों ने एक राय बनाकर दिया एकता का परिचय, चुनाव से पहले चुन ली गांव की सरकार

बोरगांव/बड़ेडोंगर. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नामांकनए व नाम वापसी प्रक्रिया अंतिम पड़ाव पर है। लेकिन विकासखंड फरसगांव के अंदरूनी क्षेत्र ग्राम पंचायत कोटपाड़ से अलग होकर नया अस्तित्व में आने के बाद ग्राम पंचायत मांदागांव के ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव में नामांकन भरने के पहले ही आम सहमति बनाकर सर्वसम्मति से पंचायत जनप्रतिनिधियों का चुनाव कर लिया।

सरपंच, उपसरपंच और सभी वार्डों के पंचों का खुद ही चयन कर लिया
इस क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा नया ग्राम पंचायत मांदागांव की मांग की गई थी। जो ग्राम पंचायत कोटपाड़ का आश्रित ग्राम था। उसे अलग कर नई ग्राम पंचायत बनाई गई। नई पंचायत होने के कारण फिजूल खर्च रोकने के उद्देश्य से गांव के गायता, पटेल एवं गणमान्य वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति में ग्रामीणों ने एक राय बनाकर एकता का परिचय देते हुए अपनी नई ग्राम पंचायत का सरपंच, उपसरपंच और सभी वार्डों के पंचों का खुद ही चयन कर लिया है और सभी पदों के लिए एक-एक ही नामांकन भरा। जिससे वे निर्विरोध ही चुन लिए गए।

इन दिनों पंचायत चुवान को लेकर सरगर्मी चरम पर
इस तरह नवनिर्वाचित पदाधिकारियों में से सरपंच फुलमा मरापी, उपसरपंच श्रवण कुमार शार्दूल, वार्ड पंच फुलेश्वरी प्रधान, निर्मला गावडे, समीला राना, उषाबाई भोयर, रामनाथ सेठिया, मन्नू राम मरापी, सुग्गो पांडे, मानुराम मंडावी, मैनुराम नाग का चयन सर्वसम्मति से किया गया है। इस मौके पर सेवानिवृत्त वन परि.अधि. एसएस प्रधान, पटेल सबराल प्रधान, गांयता लक्ष्मण प्रधान, जगबंधु सेठिया, बंशीलाल सेठिया, पीलू राम पटेल, बलराम ठाकुर, गोवर्धन सेठिया, धनसिंह सेठिया, सनऊ राम नाग, धनीराम नाग, सेवक राम माली, संता यादव, सुनील राना, किरण प्रधान, शंकर सेठिया, कुमार सेठिया, देवेंद्र सेठिया, विजय राना, पार्वती प्रधान, सोमारी पोटाई, नरेश प्रधान, कंवल सिंह कुदराम, चूंहू माली, प्रेम सिंह प्रधान, बालकुवंर प्रधान सहित अन्य वरिष्ठ ग्रामीण एवं युवाओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। ज्ञात हो इन दिनों सभी जगह पंचायत चुवान को लेकर सरगर्मी चरम पर है।

चुनावी खर्च व गुटबाजी से बचने बनाई आपसी राय
नई ग्राम पंचायत निर्विरोध चुने जाने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि ये नव गठित पंचायत के लिए ऐेतिहासिक पल है कि नवगठित पंचायत का पहला ही चुनाव गांव वालों के बीच युवाओं और बुजुर्गों के आपसी सहमति बनने के बाद चुनाव प्रक्रिया में होने वाले खर्च और गांव में आपसी विवाद को सामने रखते हुए व गांव में गुटबाजी न होकर आपसी राय बनाई गई और सर्वसम्मति से पंचायत जनप्रतिनिधियों का चयन किया गया।

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