अंबिका खदान पर 18 लोगों की आपत्ति सरकार को भेजी गई, केन्द्र सरकार लेगी अंतिम निर्णय...

अंबिका कोयला खदान के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से सभी आपत्तियां सरकार को भेज दी गई है। इसपर केन्द्र सरकार अंतिम निर्णय लेगी। खदान को लेकर क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 11 सितंबर को जनसुनवाई कराया था।

कोरबा. विकासखंड पाली के ग्राम करतली में प्रस्तावित अंबिका कोयला खदान के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से सभी आपत्तियां सरकार को भेज दी गई है। इसपर केन्द्र सरकार अंतिम निर्णय लेगी। खदान को लेकर क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 11 सितंबर को जनसुनवाई कराया था। इसमें 13 लोगों ने खदान खोलने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। जनसुनवाई से पहले दो लोगों ने विभाग को आवेदन देकर आपत्ति किया था। बाद में तीन लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। सभी आपत्ति का निराकरण एसईसीएल कैसे करेगा? इसपर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने पत्र लिखकर पूछा था। विभाग ने सभी आपत्तियों के निराकरण करने की बात कही। इसपर लिखित जबाव पेश किया। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सभी आपत्तियां प्रदेश सरकार को भेज दिया है। यहां से फाइल केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसपर सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

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विकासखंड पाली के ग्राम करतली में अंबिका खदान प्रस्तावित है। खदान संचालन एसईसीएल करेगी। खदान को चालू करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। खदान से प्रभावित होने वाले अधिकांश खातेदारों ने मुआवाजा पहले ही प्राप्त कर लिया है। कुछ खातेदार ने मुआवजा नहीं लिया है। क्षेत्रीय विधायक सहित गांव के लोग खदान का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि खदान चालू से गांव में प्रदूषण बढ़ेगा। भू-जल स्तर पर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों को खेती किसानी के नुकसान की भी आशंका है। ग्रामीण अंबिका खदान का विरोध कर रहे हैं। पर्यावरणीय जनसुनवाई के दिन भी लगभग 300 लोगों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर करके जिला प्रशासन को सौंपा था। इसपर लिखा था कि उनके गांव में खदान नहीं चाहिए।

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सरायपाली खदान से चालू नहीं हो सका कोयला खनन
खदान का विरोध सरायपाली में भी चल रहा है। ग्रामीणों के विरोध से एसईसीएल प्रबंधन सरायपाली खदान से कोयला खनन नहीं कर सक रहा है। हालांकि खदान से मिट्टी खोदने का काम चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जबतक एसईसीएल प्रबंधन नौकरी, मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया को पूरी नहीं कर देता कोयला खनन नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन भी एसईसीएल पर वादों को पूरा करने के लिए दबाव डाल रहा है। ग्रामीणों के विरोध से अभीतक कोयला खनन की प्रक्रिया चालू नहीं हो सकी है।

Vasudev Yadav
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