300 ग्रामीणों ने किया जनसुनवाई का विरोध, बोले नहीं चाहिए कोयला खदान

300 ग्रामीणों ने किया जनसुनवाई का विरोध, बोले नहीं चाहिए कोयला खदान
public hearings kartali

Vasudev Yadav | Updated: 12 Oct 2019, 12:56:08 PM (IST) Korba, Korba, Chhattisgarh, India

Coal Mines: अंबिका ओपेन कॉस्ट खदान के लिए शुक्रवार को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया। एक पत्र पर लगभग 300 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किया। इसे पर्यावणीय सुनवाई कराने वाले अफसर को सौंपते हुए कहा कि गांव की जमीन पर कोयला खदान नहीं खुलनी चाहिए। इससे होने वाले नुकसान की ओर जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल का ध्यान आकृष्ट कराया।

कोरबा. ग्रामीणों ने कोयला खदान के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई का विरोध किया है। एसईसीएल पर पेसा एक्ट के उल्लंघ का आरोप लगाया। जनसुनवाई में क्षेत्रीय विधायक ने भी राय करते हुए खदान का विरोध किया। विकासखंड पाली के ग्राम पंचायत करतली में एसईसीएल प्रबंधन अंबिका ओपेन कॉस्ट कोयला खदान खोलने की योजना पर कार्य कर रहा है।

इसके लिए शुक्रवार को ग्राम करतली के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में पर्यावरणीय जनसुनवाई का आयोजन किया गया। खदान के लिए कंपनी को लगभग 134 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। कंपनी खदान से सालाना एक मिलियन टन से 1.35 मिलियन टन कोयला खनन करना चाहती है। खदान पर ग्रामीणों की राय जानने के लिए शुक्रवार को पर्यावरणी जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इसमें ग्राम पंचायत करतली और इसके आसपास स्थित कोयला खदानों से प्रभावित होने वाले लोग शामिल हुए।

ग्रामीणों ने एक स्वर में अंबिका कोयला खदान का विरोध किया। कहा कि खदान से प्रभावित होने वाला क्षेत्र कृषि प्रधान है। इसपर आदिवासी समाज के लोग खेती बाड़ी करके परिवार चलाते हैं। खेती लोगों के आजीविका की साधन है।

ग्रामीणों ने कहा कि खदान खुलने से खेती की जमीन को नुकसान होगा। लोगों के समक्ष परिवार के जीवन यापन की गंभीर समस्या आ जाएगी। ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान खदान का विरोध किया। अपनी आपत्ति दर्ज कराई। पेसा एक्ट का पालन नहीं करने का आरोप एसईसीएल प्रबंधन पर लगाया। कहा कि जिले में पांचवी अनुसूचि लागू है। इसके बाद भी गांव में खदान खोलने के लिए ग्राम सभा से मंजूरी नहीं ली गई।

जल स्त्रोत पर भी असर
ग्रामीणों का कहना है कि खदान से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में नदी नाले भी हैं। खदान खुलने पर नादी नालों के अस्तिव पर संकट आएगी। प्रभावित क्षेत्र में जल संकंट भी गंभीर हो जाएगी।

कीमती वृक्षों की होगी कटाई
ग्रामीणों ने कहा कि खदान के लिए कीमती वृक्षों की कटाई होगी। इससे गांव के आसपास का जंगल उजड़ जाएगी। पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।

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