खदान विस्तार के लिए मिली मंजूरी, अब 22 हजार से अधिक पेड़ों पर चलेगा आरी

Coal Mines: मानिकपुर कोयला खदान (Coal Mines) के विस्तार को लेकर चल रही प्रक्रिया में तेजी आई है। जिला प्रशासन ने खदान (Mines) के विस्तार के लिए 22 हजार से अधिक पेड़ों को काटने की मंजूरी दे दी है।

कोरबा. कोयले की मांग को पूरा करने के लिए एसईसीएल की ओर से लगातार कोशिशें की जा रही है। नई खदान खोले जा रहे हैं साथ ही चालू खदानों के उत्पादन क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
एसईसीएल प्रबंधन ने मानिकपुर कोयला खदान से 5.25 मिलियन टन कोयला खनन वार्षिक करने की योजना बनाई है। इस पर कार्य चल रहा है। प्रबंधन की ओर से खदान के विस्तार के लिए प्रशासन से जमीन की मांग की गई थी। दो साल पहले ही प्रशासन ने कुछ सरकारी जमीन को प्रबंधन को लीज पर दिया था, लेकिन इस जमीन पर स्थित पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी थी।

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प्रबंधन की ओर से पेड़ों की गिनती कराई गई थी। इसे काटने के लिए कलेक्टर कोर्ट में अर्जी दी गई थी। लगभग दो साल से यह मामला कलेक्टर कोर्ट में विचाराधीन था। कोर्ट ने खदान विस्तार के लिए 22 हजार से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी है। इसमें कुछ छोटे पेड़-पौधे और झाडिय़ां भी शामिल हैं।

कोर्ट के आदेश की कापी एसईसीएल प्रबंधन के साथ वन विभाग को भी मिल गई है। वन विभाग जल्द ही मानिकपुर खदान विस्तार के लिए पेड़ों की कटाई का काम चालू करेगा। हालांकि इसके लिए वन विभाग की ओर से किसी भी रेंजर या डिप्टी रेंजर की ड्यूटी अभी नहीं लगाई गई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही यह कार्य पूरा होगा। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में पेड़ काटे जाएंगे। इसका परिवहन भी वन विभाग द्वारा किया जाएगा।

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वर्तमान उत्पादन क्षमता 4.9 मिलियन टन
मानिकपुर खदान की वर्तमान उत्पादन क्षमता 4.9 मिलियन टन वार्षिक है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में खदान में 3.5 मिलियन टन कोयला खनन वार्षिक किया जाता था। इसे बढ़ाने के लिए प्रबंधन ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अनुमति की मांग की थी। पिछले साल खदान के उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी को मंजूर पर्यावरण वन मंत्रालय ने दिया था। वर्तमान में कोयला खदान से 4.9 मिलियन टन कोयला खनन किया जा रहा है। बताया जाता है कि वर्तमान उत्पादन क्षमता के अनुसार आगामी 16 वर्षों तक खदान से कोयला खनन किया जा सकता है। प्रबंधन की ओर से उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी की जाती है तो खदान से कोयला 14 वर्ष से पहले ही खत्म हो जाएगा। प्रबंधन कोयले की मांग को पूरा करने के लिए खदान के उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी की कोशिश कर रहा है।

70 के दशक में खुली थी खदान
1965-66 में मानिकपुर खदान के लिए 194 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। अब खदान के विस्तार की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके लिए 1018.925 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित भी की गई है। जमीन अधिग्रहण के बाद विस्तार की प्रक्रिया में तेजी आई है। अब पेड़ों की कटाई के बाद खनन की प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी।

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आउटसोर्सिंग से चल रहा खदान
मानिकपुर खदान से कोयला का उत्पादन आउटसोर्सिंग के जरिए किया जा रहा है। खदान में कंपनी के नियमित कर्मचारियों की संख्या गिनती की है। ठेका मजदूर कोयला खनन से लेकर परिवहन तक के कार्य में लगे हुए हैं। कोयले का डिस्पैच भी निजी कंपनियों से कराया जा रहा है। प्रबंधन की भूमिका निगरानी तक सीमित रह गई है।

Vasudev Yadav
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