तीर्थयात्रा के नाम पर श्रद्धालुओं से छल, सेवा के नाम पर धोखा देने का आरोप

Shiv Singh

Publish: Jul, 13 2018 08:10:39 PM (IST)

Korba, Chhattisgarh, India
तीर्थयात्रा के नाम पर श्रद्धालुओं से छल, सेवा के नाम पर धोखा देने का आरोप

- कंफर्म बर्थ की बात कहकर सीट नंबर नहीं बताया

कोरबा. तीर्थ यात्रा के दौरान यात्रा करवाने वाली कंपनी पर श्रद्धालुओं ने छल के साथ दोयम दर्जे की सुविधा देने का आरोप लगाया है।
दरअसल त्रिपुर यात्रा सेवा समिति द्वारा विगत एक से १० मई तक मां वैष्णो देवी यात्रा के तहत वैष्णो देवी, हरिद्वार, अमृतसर, मथुरा और आगरा की तीर्थयात्रा करवाई गई थी। जिसके लिए स्लीपर श्रेणी में ११ हजार ५०० का ऑफर दिया गया था। प्रति व्यक्ति एक हजार रूपए देकर रजिस्ट्रेशन कराने की अनिवार्यता थी।

इस मामले में यात्रा पर गए चुन्नीलाल राजवाड़े का कहना है कि १९ नवंबर २०१७ को उन्होंने नौ-नौ हजार रुपए देकर नौ लोगों ने यात्रा में जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। समिति के कर्मचारियों ने बताया कि तीर्थ यात्रा के लिए ट्रेन में अलग से बोगी होगी। इसके बाद चार और लोगों के रजिस्ट्रेशन कराए। इस तरह १३ लोगों का तीर्थयात्रा में जाना तय हुआ। कंफर्म बर्थ की बात कहकर १८ मार्च और एक अपै्रल को बचे हुए एक लाख २७ हजार ४०० रूपए का पमेंट भी दिया गया लेकिन सीट नंबर नहीं बताया।

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यात्रा प्रारंभ होने के पहले आधी रात को मोबाईल पर मैसेज भेजा गया। जिसमें तीन अलग-अलग बोगी में १२ सीट नंबर भेजे गए। यात्रियों ने जब मैनेजर से पूछा कि १३ लोगों के लिए १२ सीटें मिली हैं। वह भी एक साथ नहीं है। तो जवाब मिला कि एक सीट नहीं मिली है आपको एडजस्ट करना पड़ेगा।

परिवार में कुछ वृद्ध भी थे इसलिए यह तय हुआ कि बिलासपुर से सीट मिल जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके बाद १३ लोगों के लिए १२ सीट टे्रन क्रमांक १२५४९ दुर्ग से जम्मूतवी में दिया गया। सेवा की शर्तों के अनुसार बताया गया था कि यात्रा शुरू होते ही प्रत्येक यात्री को पानी की चार-चार बोतलें दी जाएगी। १३ लोगों की बुकिंग के अनुसार ५६ बोतल दी जानी थी लेकिन ३६ बोतल पानी ही दिया गया। वह भी रात के आठ बजे।

यात्रा के दौरान भी परेशानी
यात्रा शुरू होने के बाद दूसरे चरण में तीर्थयात्री ४ मई को रात ९:२५ बजे टे्रन नंबर १९२६६ से जम्मूतवी से अमृतसर के लिए रवाना हुए। वह रात के दो बजे अमृतसर पहुंचे। यहां रात्रि तीन बजे तक रेलवे स्टेशन पर बस खराब हो गई है ऐसा बहाना बनाकर रोका गया। इसके बाद जिस लॉज में रुकवाया गया, वह बेहद खराब सुविधा थी। जहां पानी व शौचालय भी बहुत गंदे, भोजन की व्यवस्था भी घटिया थी। इसके बाद उत्कल एक्सप्रेस से हरिद्वार से मथुरा जाते समय इस ट्रेन में १३ लोगों के लिए अब केवल आठ ही बर्थ मौजूद थे।

-यात्रा के दौरान 100 यात्री यात्रा कर रहे थे, थोड़ी ऊंच-नीच होना स्वभाविक है। हमारे द्वारा अलग बोगी उपलब्ध कराने की बात कभी नहीं की गई है। १३ में एक बच्चा होने के कारण एक सीट हाफ बर्थ थी। दूसरी बार भी उन्हें ८ और ४ के हिसाब अलग-अलग बोगी में सीटें दी गई थी। सारे आरोप निराधार हैं। हमारे द्वारा उच्च स्तरीय सेवाएं दी गई हैं। सभी वादों को निभाया गया है-अशोक यादव, अध्यक्ष त्रिपुर यात्रा सेवा समिति

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