कोरबा. १८वीं राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का मंगलवार को समापन हुआ। इसके साथ ही प्रदेश भर के १२ जोन के लगभग १३०० खिलाड़ी, कोच व मैनेजर अपने-अपने खट्ठे-मीठे अनुभव लेकर घर लौट गए। कोरबा जिले को चार खेलों की मेजबानी मिली थी। इन चार खेलों में प्रत्येक खेलों के प्राप्तांकों के आधार पर रायपुर जोन को ओवरऑल चैंपियन घोषित किया गया।

जिले के सीएसईबी फुटबॉल मैदान में १८वीं राज्य स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिताओं का मंगलवार को समापन किया गया। इस दौरान कस्तूरबा गांधी रामपुर की बालिकाओं के साथ डिंगापुर की छात्राओं ने भी रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के समापन में प्रास्तावित मुख्य अतिथि नहीं पहुंच सके थे। जिसके कारण बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत के उपाध्यक्ष अजय जायसवाल ने कहा कि खेल से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी होता है। पहले संसाधन कम थे। अब राज्य व केन्द्र सरकारों के साथ प्रशासनिक अफसर भी खेलों को बढ़ावा देने की सोचते हैं।

नवपदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि खेल को सदैव खेल भावना से खेलना चाहिए। ओलंपिक संघ के सचिव सुरेश क्रिस्टोफर ने कहा कि बारिश के कारण मैदान तैयार करने में थोड़ी दिक्कत आई। खेल के कारण ही मुझे नौकरी मिली है। समापन अवसर पर शिक्षा विभाग के सभी पीटीआई व अधिकारी मौजूद रहे।

कांकेर को अनुशासन का पुरस्कार
प्रतियोगिता में २२२ अंक प्राप्त करने वाले रायपुर जोन को चैंपियन तो दुर्ग को १९५ अंकों के साथ उपविजेता घोषित किया गया। जबकि १८५, १२० व ११० अंकों के साथ क्रमश: जांजगीर, राजनांदगांव और बिलासपुर तीसरे, चौथे व पांचवे स्थान पर रहे। कांकेर को सबसे अनुशासित जोन का पुरस्कार मिला तो बस्तर को समापन के दिन बेस्ट मार्चपास्ट का पुरस्कार प्रदान किया गया।

किक बॉक्सिंग और रोपस्किपिंग को नहीं मिला टीम पुरस्कार
नेटबॉल सहित क्रिकेट व अन्य खेलों में खिलाडिय़ों के टीम एवॉर्ड के साथ ही सभी वर्गों में व्यक्तिगत पुरस्कार दिए गए। लेकिन जिस किकबॉक्सिंग की बदौलत जांजगीर जोन की टीम तीसरे पायदान पर रही, उन्हें किसी भी वर्ग में टीम अवॉर्ड प्रदान नहीं किया गया। रोप स्किपिंग के खिलाडिय़ों के साथ भी ऐसा ही हुआ। इन दोनों ही खेलों के खिलाड़ी पुरस्कार वितरण के दौरान अपना नाम पुकारे जाने का इंतजार करते रहे। लेकिन इन्हें पुरस्कार नहीं मिला, जिससे बच्चों में मायूसी छा गई।

मीनू के अनुसार नहीं मिला भोजन
समापन के दौरान सभी जोन के कोच व मैनेजन चर्चा कर रहे थे कि इस बार के भोजन की व्यवस्था बेहतर नहीं थी। खिलाडिय़ों का डाईट प्लान तो दूर भोजन दिए जाने के दौरान मीनू का भी पालन नहीं किया गया।

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