कोयला उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई का विरोध, 24 को हड़ताल, बीएमएस को छोड़कर सभी श्रमिक संगठन होंगे शामिल, जानें प्रमुख मांगें...

Coal India: कन्वेंशन को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार कोयला उद्योग के खिलाफ नीति अपना रही है। इस नीति से कोयला उद्योग में काम करने वाले मजदूूर और अफसर दोनों का नुकसान हो रहा है।

By: Vasudev Yadav

Published: 05 Sep 2019, 08:09 PM IST

कोरबा. कोल इंडिया (Coal India: ) में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के खिलाफ श्रमिक संगठन लामबंद होने लगे हैं। श्रमिक संगठनों ने कोयला उद्योग में 24 सितंबर को एक दिन की हड़ताल की घोषणा की है। गुरुवार को रांची में एक संयुक्त कन्वेंशन का आयोजन किया गया। इसमें एटक, सीटू, हिन्द मजदूर संघ, इंटक और एक्टू के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में कोयला उद्योग में केन्द्र सरकार के नीतियों की समीक्षा की गई। सरकार की नीतियों को कोयला उद्योग के खिलाफ बताया गया।

श्रमिक नेताओं ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अगस्त को कोयला उद्योग में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी। सरकार के निर्णय से मजदूरों के समक्ष कोयला उद्योग को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके पहले सरकार ने कोयला खान अधिनियम 2015 पारित किया। इससे कोयला उद्योग के निजीकरण का रास्ता साफ हो गया।

कमर्शियल माइनिंग के नाम पर निजी कंपनियों को बाजार में कोयला बेचने की छूट दी गई। सरकार ने कोल इंडिया के रिजर्व फंड में से 63 हजार करोड़ रुपए लिया। इससे कोल इंडिया कमजोर हुआ। बाई बैक के जरिए अनुषांगिक कंपनियों के शेयर में बाजार से लिए गए। इससे अनुषांगिक कंपनियों को भी नुकसान हुआ। बैठक में बासुदेवाचार्य, डीडी रामानंदन, एसके पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रमिक नेता शामिल हुए।

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सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करना चाहती है सरकार
कन्वेंशन में श्रमिक नेताओं ने कहा कि सरकार सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग कर एक करना चाहती है। एक स्वतंत्र कंपनी बनाकर मजदूरों की एकता को तोडऩा चाहती है। इससे सफल नहीं होने दिया जाएगा। श्रमिक नेताओं ने एकजुट होकर संघर्ष की बात कही।

... तो 100 मिलियन से ज्यादा उत्पादन वाली कंपनियां होंगी अलग
श्रमिक नेताओं ने कहा कि सरकार की योजना सालाना 100 मिलियन टन से अधिक कोयला खनन करने वाली कंपनियों को अलग करने की है। सरकार एसईसीएल, एमसीएल और एनसीएल को कोल इंडिया से अलग करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसका श्रमिक संगठन विरोध करते हैं।

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कन्वेंशन में प्रमुख मांग
- कोल इंडिया में 100 फीसदी एफडीआई के फैसले को वापस ले सरकार
- सभी अनुषांगिक कंपनियों को मिलाकर एक कंपनी कोल इंडिया बनाई जाए
- ठेके पर कोयला खनन व डिस्पेच बंद किया जाए
- पूर्व की भांति नियोजन जारी रखा जाए

-कोयला उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई के विरोध में 24 सितंबर को एक दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया गया है। मांग पूरी नहीं होने पर दोबरा निर्णय लिया जाएगा। बीएमएस की नीतियों से लगता है कि वह हड़ताल में शामिल नहीं होगी। वीएम मनोहर, श्रमिक नेता सीटू

Vasudev Yadav
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