Corona Effect: सड़क मार्ग से कोयला परिवहन घटा, बिजली प्लांटों में कोयला संकट गहराने की आशंका, ट्रक ड्राइवर ने ये कहा

Corona Effect: देशभर मेें कोरोना पॉजिटव मरीजों की बढ़ती संख्या लोगों की बढ़ा रही है चिंता, रेल रैक से होने वाली कोयला आपूर्ति भी प्रभावित

कोरबा. कोरोना वायरस के भय से कोयला उद्योग भी अछूता नहीं है। सुरक्षा के लिहाज से अधिकतर मजूदर काम पर नहीं जा रहे हैं। इसमें ड्राइवर भी शामिल है। इनकी कमी से सड़क मार्ग से होने वाला परिवहन लगभग ठप हो गया है। यही हाल रहा तो बिजली कारखानों में कोयला संकट गहराने की आशंका है। इसका बड़ा कारण कोरोना का भय है।

दुनिया के लिए महामारी बन चुके कोरोना से देशभर में लॉकडाउन है, लेकिन सरकार ने आवश्यक सेवाओं को छूट दी है, लेकिन सड़कों पर छायी वीरानी और देशभर मेें कोरोना पॉजिटव मरीजों की बढ़ती संख्या लोगों की चिंता को बढ़ा रही है। लोग जरुरी काम से भी घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।

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एसईसीएल की कुसमुंडा खदान से कोयला लेकर रायगढ़ और रायपुर की ओर जाने वाले ड्राइवर श्याम सिंह भी परेशान हैं। श्याम कई वर्षों से कोयला परिवहन करने वाली गाड़ी को चलाते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के भय से लोग एक दूसरे से बात नहीं कर रहे हैं। दूरी बनाकर रह रहे हैं। बाजार बंद है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। इस स्थिति में कुसमुंडा से रायगढ़ या रायपुर तक कोयला परिवहन मुश्किल हो गया है। बाजार बंद होने से भूखे पेट गाड़ी चलाना संभव नहीं है। श्याम ने आगे कहा कि जेब में पैसा होने के बाद भी कुसमुंडा में भी खाने को नहीं मिल रहा है।

एक कोल ट्रांसपोर्टर ने बताया कि कुसमुंडा खदान से रोजाना 800 से एक हजार ट्रकें कोयला लेकर अलग अलग स्थानों के लिए जाती हैं। लेकिन कोरोना के भय से ड्राइवर गाड़ी चलाने को तैयार नहीं है। बड़ी मुश्किल से कोई ड्राइवर गाड़ी ले जाने को तैयार हो रहा है। हालांकि प्लांटों में कोयले की किल्लत न हो। इसके लिए निजी कंपनियों के कर्मचारी कोरोना के भय के बीच काम करने को मजबूर हैं।

Vasudev Yadav Desk
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