पूर्व एसी ट्रायबल की मुश्किलें बढ़ी, ईओडब्लू ने दुबे के खिलाफ जांच की मांग की

पूर्व एसी ट्रायबल की मुश्किलें बढ़ी, ईओडब्लू ने दुबे के खिलाफ जांच की मांग की

Vasudev Yadav | Updated: 27 May 2019, 08:33:30 PM (IST) Korba, Korba, Chhattisgarh, India

डीएमएफ के नोडल अधिकारी रहते हुए की गई गड़बड़ी की हुई थी शिकायत
शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने के बाद शिकायत सही पाई गई

कोरबा. पूर्व एसी ट्रायबल की मुश्किलें बढ़ गई है। ईओडब्लू ने श्रीकांत दुबे के खिलाफ जांच की मांग की है। डीएमएफ के बतौर नोडल अधिकारी रहते हुए दुबे द्वारा की गई गड़बड़ी पर शिकायत हुई थी। शिकायकर्ता का बयान दर्ज करने के बाद शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई है।
आदिवासी विकास विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त श्रीकांत दुबे को डीएमएफ का नोडल अधिकारी बनाया गया था। नोडल अधिकारी रहते हुए खुद के विभाग सहित अन्य विभागों के कार्यों में भी कई वित्तिय गड़बड़ी की गई थी। इस मामले की शिकायत जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय जायसवाल ने सीएम से पाली महोत्सव के दौरान की थी। सीएम ने जांच के लिए ईओडब्लू को अग्रेषित कर दिया था। ईओडब्लू में शिकायतकर्ता अजय जायसवाल का बयान पांच दिन पूर्व ही दर्ज किया गया है। बयान दर्ज होने के बाद ईओडब्लू ने मामले की जांच की। प्रथम दृष्टया विभाग को शिकायत सही मिली है। लिहाजा अब ईओडब्लू ने आदिवासी विकास विभाग को पत्र लिखकर मांग की है कि कोरबा में पदस्थ रहे पूर्व एसी ट्रायबल के खिलाफ जांच की जाए। जांच की अनुमति मिलने के बाद दुबे की मुश्किलें बढ़ी गई है।

कैग की रिपोर्ट में श्रीकांत दुबे चौतरफा घिरे
कैग की रिपोर्ट ने भी कोरबा के डीएमएफ में हुई वित्तिय गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए हैं। अपनी रिपोर्ट में कैग ने भी कहा है कि एजुकेशन हब के निर्माण में ३४.५८ लाख का अतिरिक्त भुगतान ठेकेदार को किया गया। ठेकेदार को १८ माह में काम पूरा करना था। लेकिन पूरा हुआ २५ महीने में। इसी तरह फर्नीचर में ८५.७९ लाख की खरीदी मेंं भी कई सवाल उठाए गए हैं। निर्माण कार्यों की शेष बचत राशि से हॉस्टल अधीक्षकों को शिष्यवृत्ति भुगतान हेतु दिया गया है। जिसकी राशि समायोजन नहीं करने पर कैग ने आपत्ति की है।

बंजारे को रिपोर्ट विभाग को देने की जरूरत क्यों पड़ी?
परियोजना प्रशासक बी आर बंजारे को आखिर जांच रिपोर्ट अपने विभाग को सौंपनी क्यो पड़ी। इसपर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। शासन ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी थी। कलेक्टर ने तीन सदस्यीय एडीएम, कोषालय अधिकारी और बंजारे को जांच टीम बनाया। बंजारे ने विभागीय जांच की। इस रिपोर्ट को बने लगभग एक माह बीत चुका है। बंजारे ने अपने मुख्यालय को ७ मई को रिपोर्ट भेज दी है। सवाल उठता है कि इस रिपोर्ट को टीम ने अब तक लिया क्यों नहीं। आखिर ऐसी कौन सी स्थिति निर्मित हुई की बंजारे ने अपनी रिपोर्ट को स्थानीय स्तर पर भेजने की बजाएं मुख्यालय को देना उचित समझा। प्रशासनिक महकमे में सोमवार को दिनभर इसे लेकर चर्चा का विषय बना रहा।

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