धनतेरस की धूम, बाजार में बूम, देर रात तक दुकानों में रही ग्राहकों की भीड़, करोड़ों का हुआ व्यवसाय

Diwali Festival 2019: धनतेरस के अवसर पर शुक्रवार को बाजार में खरीदारी पूरे शबाब पर रहा। पुष्य नक्षत्र के चार दिन बाद एक बार फिर व्यवसाय के लिए शुभ मुहुर्त आया था। धनतेरस के अवसर पर जिले में करीब 15 करोड़ रुपए का व्यापार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

By: Vasudev Yadav

Published: 25 Oct 2019, 08:47 PM IST

जांजगीर-चांपा. व्यापारियों ने धनतेेरस के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। लोगों ने भी इस दिन शुभ मुहुर्त में खरीददारी करने एडवांस बुकिंग करा ली थी। सोना-चांदी, बर्तन, कपड़ों वाहन के साथ दूसरी वस्तुओं की भी जमकर बिक्री हुई। सराफा बाजार में पूरे दिन रौनक रही। खासकर महिलाओं की भीड़ पूरे दिन ज्वेलरी दुकानों में लगी रही। पूजा के लिए लोगों ने सोने-चांदी के सिक्के भी जमकर खरीदे। कुछ दुकानों में तो शाम के बाद सोने के सिक्कों की कमी भी पड़ गई थी।

सराफा व्यापारियोंं की मानें तो जिलेभर में करीब 8 करोड़ का कारोबार हुआ। इसी तरह आटोमोबाइल्स में करीब 5 करोड़ और इलेक्ट्रिानिक्स में 2 करोड़ का अनुमानित कारोबार जिलेभर में हुआ। बर्तन, सजावटी सामान, फर्नीचर और कपड़े की बिक्री भी जमकर हुई। बर्तन दुकानों में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां व कांसे, स्टील के बर्तन की अधिक माग रही। लोगों ने इस दिन बड़ी संख्या में वाहनों की खरीदी की। इसके लिए महीने भर पहले से ही बुकिंग शुरू हो गई थी।
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सड़क पर सामान, लोग हलाकान
शहर में अतिक्रमण रोकने ट्रैफिक पुलिस द्वारा की गई तमाम कोशिशों पर धनतेरस को व्यापारियों ने पानी फेर दिया। ट्रैफिक व्यवस्था सुधरने के लिए दीपावली के पूर्व सारे प्रयास निरर्थक साबित हो रहे हैं। क्योंकि व्यापारियों ने सड़क तक टेंट लगा लिए और दुकान का सामान सड़क तक बिखरा दिया। इस वजह से शाम से ही कचहरी चौक से लेकर नेताजी चौक व रेलवे स्टेशन तक जाम की स्थिति बन गई। व्यवस्था संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस नजर ही नहीं आएं।

भगवान धन्वंतरी की हुई पूजा
माना जाता है कि धनतेरस के दिन समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों में भगवान धन्वंतरी का प्रादुर्भाव हुआ था। उन्हें आयुर्वेद का प्रसार करने का वरदान मिला था। धन्वंतरी की जगह धन की पूजा करने के पीछे एक किवदंती है कि इस दिन राजा बलि ने कैद किए गए देवताओं के साथ धन की देवी लक्ष्मी को मुक्त किया था। यही वजह है कि लोग घरों में लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने लगे। घर में आभूषण या सोना-चांदी खरीदने की परंपरा भी विकसित और विस्तृत हुई, लिहाजा लोग इस दिन गाडिय़ां कपड़े, इलेक्ट्रानिक्स व अन्य सामान भी खरीदते हैं।

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पांच दिनों की दिवाली शुरू
शुक्रवार को धनतेरस के साथ ही पांच दिनों का दीपोत्सव शुरू हो गया। इसके दूसरे दिन नरक चौदस, तीसरे दिन दीपावली चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में दीपावली को सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है।

नरक चौदस पर आज होगा जागरण
धनतेरस के अगले दिन यानी शनिवार को नरक चौदस के रूप में मनाया जाएगा। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। अमावस्या से पहले इस अंधेरी रात में लोग जागरण करेंगे। घरों में पूजा कर रोग विमुक्त होने की याचना करेंगे। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन शाम के समय घर पर 14 दीपक जलाने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। रात में महिलाएं घर की देहरी के बाहर यम की पूजा कर उनके निमित्त दीपदान करेंगी।

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