पत्रिका जनएजेंडा में युवाओं की रोजगार और उच्च शिक्षा की बात, सडक़ दुर्घटनाओं से सभी हैं आहत

देश के सबसे बड़े चुनाव के पहले पत्रिका ने जनएजेंडा के तहत कॉलेज के युवाओं से चर्चा की। इस दौरान बेरोजगारी और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का मुद्दा छाया रहा है।

By: Vasudev Yadav

Updated: 04 Apr 2019, 08:54 PM IST

कोरबा. लोकसभा चुनाव मेें ऐसे कौन से मुद्दे हैं जिसे लेकर हर छोटे से लेकर बड़े वर्ग तक की मांग है। इसे लेकर पत्रिका द्वारा आयोजित जनएजेंडा पर बुधवार को सुबह खिलाडिय़ों से चर्चा की गई। खिलाडिय़ों ने अपनी बातें रखी। कई ऐसे मुद्दे भी सामने आए जिसे लेकर राजनीतिक पार्टियों द्वारा अब तक विचार तक नहीं किया गया है। वहीं अधिकांश ऐेसे मुद्दे भी सामने आए जिसकी आस में अब तक कोरबा शहर है। जिसकी घोषणाओं के दम पर अब तक राजनीतिक पार्टियां वोट लेती रही है। खिलाडिय़ों ने कहा पिछले १० साल में स्वास्थ्य, शिक्षा पर एक भी बड़ा प्रोजेक्ट कोरबा में नहीं आया। उद्योगों को पंख नहीं लगे। हायर एजुकेशन के नाम पर सिर्फ छलावा किया गया। ऊर्जाधानी के दम पर पूरे देश को रोशन करने की बात की जा रही है। लेकिन हमारे यहां ही इतनी लचर व्यवस्था है कि हर वर्ग परेशान है। इन वर्षों में कोरबा को मिला सिर्फ धूल, ट्रैफिक, सडक़ दुर्घटना, बेरोजगारी। अब तक कोरबा पिछड़ा हुआ ही जिला है। इसके विकास के पंख हर पहलू पर लगाना ही सबसे बड़ा मुदद है। जन एजेंडे के दौरान पार्षद अब्दूल रहमान, राहुल यादव, मनोज यादव, संदीप कुमार, जसबीर शर्मा, राम कुमार, मोनू साहू, राज रात्रे, सुरेन्द्र यादव, मनीष सिन्हा, रवि रात्रे, अनवर, रिंकू कुमार, राजन, आकाश कुमार, दुर्गेश श्रीवास्तव, हेमंत सारथी, राजेश कुमार, सुमीत महंत सहित अन्य उपस्थित थे।

ये मुद्दे आए सामने
- हर वर्ग के लिए सर्वसुविधायुक्त अस्पताल, जहां हर बीमारी को हो इलाज, रेफर की ना पड़े जरूरत।
- बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए जिले के उद्योगों में स्थानिय बेरोजगारों के लिए आरक्षण।
- कोरबा जिला खदानों व संयंत्रों का प्रदूषण झेल रहा, बिजली बिल में विशेष रियायत।
- कोरबा से रायपुर तक हवाई सेवा शुरू हो ताकि महानगरों से कोरबा सीधे जुड़ सके।
- शहर के सभी रेलवे क्रासिंग में ओवरब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण हो, ताकि जाम से निजात मिले।
- उच्च शिक्षा के नाम पर एक भी बड़ा संस्थान नहीं, जो हैं उनमें रिसर्च सेंटर तक नहीं बनाया गया है।
- स्पोट्र्स के नाम पर बड़े शहरों की तर्ज पर स्पोट्र्स काम्पलेक्स बने ताकि हर ख्ेाल को बढ़ावा मिल सके।
- सर्वमंगला पुल के उसपार पश्चिम क्षेत्र सबसे अधिक पिछड़ा हुआ है। उड़ती धूल और सडक़ दुर्घटना को कम करना होगा।
- केन्द्र सरकार ने खनिज न्यास के करेाड़ो दिए, अब तक इसका उपयोग नहीं हुआ। इस फंड से कोरबा शहर को चमकाना होगा।
- व्यापारिक गतिविधियां तीन सडक़ों पर सिमट गई है। इसे बढ़ावा देने के लिए नए सस्थानों का निर्माण व बेरोजगारेां को सस्ते दर पर इसे उपलब्ध कराया जाए।

 

देश के सबसे बड़े चुनाव के पहले पत्रिका ने जनएजेंडा के तहत कॉलेज के युवाओं से चर्चा की। इस दौरान बेरोजगारी और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का मुद्दा छाया रहा है।
जनएजेंडा पर चर्चा के दौरान ममला, प्राची, आरती, अन्नपूर्णा, सुलोचना, अनुराधा और मनीशा सहित अन्य युवा मौजूद रहे। सभी ने जिले के मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
किसी ने कहा कि रजगामार को नगर पंचायत कर दर्जा मिलना चाहिए, तो कोई सडक़ दुर्घटना पर पूरी तरह से लगाम चाहता है। कोरबी-चोटिया में कॉलेज के साथ ही शहर की ट्रैफिक से लेकर युवाओं ने नेताओं की बड़ी-बड़ी बातों तक अपनी राय दी।

इन मुद्दों पर युवाओं ने दी राय
- दीपका सहित पश्चिम क्षेत्र पूरी तरह से खदान प्रभावित है। जहां के लोग प्रदूषण से परेशान हैं। कोयले की डस्ट का स्थाई समाधान होना चाहिए।

- शहर में ट्रैफिक की स्थिति बेहद खराब है, ट्रैफिक को व्यवस्थित करने की दिशा में ठोस पहल होनाचाहिए।

- रजगामार क्षेत्र की जनसंख्या को ध्यान में रखकर इसका विकास होना चाहिए। नगर पंचायत का का दर्जा मिलना चाहिए।

- युवा इंजीनियरिंग करके भी बेरोजगार भटक रहे हैं, पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के लिए हर हाल में रोगजार मिलना चाहिए।

- नेता पहले बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह सभी बातो को भूल जाते हैं। नेता अपने वादे पूरे करें तो, परेशानी हल हो जाएगी।

- जिले सडक़ दुर्घटनाओं में आए दिन लोगों की मौत हो जाती है। भारी वाहन यमदूत बनकर सडक़ों पर दौड़ रहे हैं। सडक़ दुर्घटनाओं मे कमी लाने के प्रयास हों।

- ऊर्जाधानी में रहने के बावजूद भी हमें निर्बाध बिजली की आपूर्ति नहीं हो पाती। ऐसे कई इलाके हैं, जहंा बिजली नहीं है। हर घर में बिजली होनी चाहिए।

- राज्य के सबसे बड़े विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा में कॉलेज की नहीं है। यहां उच्च शिक्षा का बेहद बुरा हाल है।

जनएजेंडा में युवओं की रोजगार और उच्च शिक्षा की बात
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