CG assembly elections 2018 : विधानसभा से लोकसभा चुनाव तक आते-आते एक ही साल में बदल गया जनता का मूड

CG assembly elections 2018 : विधानसभा से लोकसभा चुनाव तक आते-आते एक ही साल में बदल गया जनता का मूड

Jayant Kumar Singh | Publish: Oct, 13 2018 02:15:53 PM (IST) Korba, Chhattisgarh, India

भाजपा की जीत में कोरबा विधानसभा के मतदाता किंगमेकर

कोरबा. 2013 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में शहर के मतदाताओं ने कांग्रेस को बहुमत दिया, लेकिन इसके ठीक एक साल बाद जब लोकसभा के चुनाव हुए तब भाजपा की जीत में कोरबा विधानसभा के मतदाताओं ने किंगमेकर की भूमिका अदा की थी, जिसकी बदौलत ही भाजपा को जीत मिली।


अब फिर से प्रदेश में चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है। जिले में दूसरे चरण के मतदान के दौरान 20 नवंबर को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़ों ने जिले के कोरबा विधानसभा के चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। हर आम और खास के दिमाग में यह सवाल है कि इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा।

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मैदान में भाजपा और कांग्रेस के अलावा जोगी कांग्रेस सहित कई अन्य निर्दलीय कद्दावर दावेदार भी ताल ठोंकने को पूरी तरह से तैयार हैं। इससे दोनों प्रमुख दल भी भली-भांति परिचित हैं। कोरबा विधानसभा के पिछले दो चुनाव के आंकड़ों से कोई भी पार्टी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है। इसलिए सभी अपने-अपने स्तर पर अंदर ही अंदर तगड़ी तैयारी कर रहे हैं। फिर चाहे वह कांग्रेस, भाजपा, जनता कांग्रेस हो या फिर आम आदमी पार्टी सहित निर्दलीय प्रत्याशी।


सांसद को 19 हजार की लीड जबकि इसके पहले कांग्रेसी विधायक जीते
कोरबा विधानसभा में दिलचस्प मुकाबले की बात पर यहां हुए पिछले लोकसभा व विधानसभा के चुनावी आंकड़े मुहर लगाते हुए प्रतीत हो रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2013 में कांग्रेस के विधायक जयसिंह अग्रवाल को अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के जोगेश लांबा से 14 हजार 449 अधिक मत मिले थे।

जबकि लोकसभा चुनाव 2014 में इसी सीट से भाजपा के सांसद डॉ बंशीलाल महतो को निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के डॉ. चरण दास महंत से 19 हजार 802 मतों से लीड मिली थी। जबकि कोरबा लोकसभा की कुल आठ विधानसभा सीटों में से अन्य सात में दोनो प्रत्याशियों के मध्य कड़ा संघर्ष देखने को मिला था। महतो कोरबा के साथ ही कटघोरा, भरतपुर-सोनहत, मनेंद्रगढ़ व बैकुंठपुर से आगे थे। तो महंत को रामपुर, पाली-तानाखार और मरवाही से अच्छी-खासी लीड मिली थी। हालांकि अंत में डॉ. महतो कुल चार हजार 265 वोट के अंतर से लोकसभा चुनाव जीत गए थे।

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