चुनाव से पहले सरकार का दांव, एसईसीएल के 13 पुनर्वास गांव बनाए जाएंगे मॉडल ग्राम

डीएमएफ फंड से भूविस्थापितों के गांव में होंगे विकास कार्य

Shiv Singh

September, 1111:52 PM

कोरबा. आचार संहिता लगने के लगभग एक महीने पहले सरकार ने भूविस्थापितों की नाराजगी दूर करने के लिए बड़ी घोषणा की है। एसईसीएल क्षेत्र के 13 पुनर्वास गांव को अब सरकार मॉडल ग्राम बनाएगी। गांव के नाम तय कर लिए गए हैं। बहुत जल्द हर गांव में ग्राम सभा का आयोजन होगा जिसके बाद गांववार काम का ब्यौरा तय होगा।
जिला खनिज न्यास मद के अन्तर्गत खदान से लगे प्रभावित क्षेत्र में काम करवाना है। इसके लिए भूविस्थापित लंबे समय से मांग कर रहे थे। पिछले दिनों हुई बैठक में मॉडल ग्राम बनाने को लेकर सहमति दे दी गई है। कुल १३ गांव को मॉडल बनाया जाएगा। जिन गांव को मॉडल बनाना है उसमें गेवरा, दीपका व कुसमुंडा खदान क्षेत्र के प्रभावित गांव शामिल है। गौरतलब है कि भूविस्थापित जमीन अधिग्रहण के बाद लंबे अरसे से नौकरी सहित पुनर्वास गांव में विकास कार्यों के लिए आंदोलित थे।
एसईसीएल प्रबंधन द्वारा इन गांव में काम कराने को लेकर रूचि नहीं ली जा रही थी। जितने भी गांव पुनर्वास के तहत बसाए गए उन जगहों पर 15 से 20 साल पूर्व काम किया गया था। मूलभूत सुविधा के लिए विस्थापित लोग परेशान थे।
पुनर्वास गांवों में पानी व सड़क की समस्या बनी रहती है। गर्मी के मौसम में यहां निवासरत लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। इसके अलावा बारिश के मौसम में सड़क की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। पुनर्वास ग्रामों में अधिकांश सड़कें कच्ची हैं। इसके कारण बारिश में सड़क कीचड़ से भर जाता है। इसी तरह बिजली की भी पर्याप्त सुविधा नहीं दी गई है। गलियों में स्ट्रीट लाइट नहीं होने से अंधेरा छाया रहता है। डीएमएफ फंड बनने के चार साल गुजर जाने और लगभग 700 करोड़ रूपए खर्च करने के बाद खनिज न्यास समिति ने पुनर्वास ग्राम की सुध ली। जबकि डीएमएफ के गाइडलाइन के मुताबिक सबसे पहले खर्च उन गांव मेें कराना था जहां के ग्रामीण प्रदूषण से सबसे अधिक हलाकान हो। शुरूआत मेंं समिति ने आनन-फानन में करोड़ों के प्लान बना दिए गए। खर्च भी कर दी गई। रूर्बन मिशन के तहत भी हरदीबाजार कलस्टर के पांच गांव में कार्य स्वीकृत कराए गए थे। लेकिन जो काम स्वीकृत कराए गए आधे से ज्यादा सामान्य काम जैसे सीसी रोड, नाली पर काम कराए गए। लेकिन जो बडे निर्माण थे वे अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। दो साल गुजरने को है पर अब तक निर्माण की चाल सुस्त ही है।
रिपोर्ट में लगाए गए थे गंभीर आरोप
सेंट्रल फॉर साइंस एंड इन्वायरोमेंट ने डीएमएफ को लेकर पिछले महीने जारी रिपोर्ट में कहा था कि कोरबा में प्रभावित क्षेत्रों में राशि खर्च नहीं की गई है, जबकि अन्य जगहों पर जरूरत से ज्यादा राशि खर्च की गई थी। इस रिपोर्ट के आने के बाद खनिज न्यास समिति ने आनन-फानन में १३ गांव को मॉडल बनाने का निर्णय लिया।

7 हजार वोटरों को खुश करने में लगी भाजपा
भाजपा मॉडल ग्राम के बहाने कटघोरा विधानसभा के लगभग 7 से 8 हजार वोटरों को साधने में लग गई है। दरअसल संसदीय सचिव लखनलाल देवांगन के क्षेत्र में भूविस्थापितों में इसे लेकर नाराजगी थी। नाराजगी दूर करने के साथ-साथ वोटरों को खुश करने में पार्टी जुटी हुई है। 13 गांव में से ९ गांव कटघोरा विधानसभा अंतर्गत हैं।
ये गांव बनेंगे मॉडल
गेवरा क्षेत्र, मड़वाढोढ़ा, विजयनगर, नेहरूनगर, दीपका क्षेत्र गांधीनगर, विवेकानंदनगर, चैनपुर, बतारी, कुसमुंडा क्षेत्र, सर्वमंगला नगर, वैशालीनगर, लक्ष्मण नगर, यमुनानगर को शामिल किया गया है। मॉडल गांव बनने से यहां के लोगों को सुविधा मिल सकेगी।

-डीएमएफ की बैठक में 13 गांव को मॉडल बनाने के लिए स्वीकृति मिली है। हर गांव में ग्राम सभा का आयोजन कर प्रस्ताव लिया जाएगा। फिर उन कार्यों में शाषी समिति की बैठक कर उसकी स्वीकृति के बाद काम शुरू होगा।
ममता यादव, डिप्टी कलेक्टर, प्रभारी डीएमएफ

Shiv Singh
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