इस वैज्ञानिक युग में भी आयुर्वेद के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा, तीन साल में 21 हजार लोग पहुंचे आयुष तक

2016-17 में जहां 6000 रोगियों का इलाज हुआ। तो वहीं वर्ष 2017-18 में 6400 मरीजों का। अप्रैल 2018 से मार्च 2019 में अस्पताल में कुल मरीज 124836 संख्या रही

By: Vasudev Yadav

Published: 04 Apr 2019, 12:39 PM IST

कोरबा. इस आधुनिक वैज्ञानिक युग में आयुर्वेद के प्रति लोगों का भरोसा किस प्रकार से बढ़ा है इसकी गवाही उस अंग्रेजी इलाज वाले अस्पताल के काउंटर से मिलता है जहां लोग जाते तो जरूर हैं पर पर्ची आयुर्वेद से इलाज की कटवा रहे हैं। यदि हम डेटा की बात करें तो अस्पताल की प्रतिदिन के ओपीडी में आयुष चिकित्सकीय परामर्श लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। इतना ही नहीं इसके इलाज का सक्सेस रेट भी संतोषजनक बताया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह भी है कि आयुर्वेद के प्रति पुरुषों का विश्वास तेजी से बढ़ा है इसकी भी गवाही आंकड़े दे रहे हैं।

यदि कोरबा जिले की बात करें तो और आयुर्वेदिक इलाज करवाने वाले मरीजों की संख्या की बात करें तो वर्ष 2016-17 में जहां 6000 रोगियों का इलाज हुआ। तो वहीं वर्ष 2017-18 में 6400 मरीजों का। अप्रैल 2018 से मार्च 2019 में अस्पताल में कुल मरीज 124836 संख्या रही, जिसमें 9027 मरीज आयुष विंग में थे यानि आयुर्वेद की शरण में। ओपीडी को ही लें तो 16-17 में जहां प्रतिदिन 35-40 ओपीडी थी ,तो वहीं 17-18 में यह संख्या बढ़कर 65-70 यानि दैनिक औसत 2016-17 में 20.0 प्रतिशत था जो 17-18 में 21.64 दर्ज हुआ।

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डॉ. विमल चंद जैन आयुष विंग प्रभारी जिला अस्पताल कोरबा ने बताया कि लोगों में आयुर्वेद को लेकर विश्वास जागा है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी लोग आयुष विंग आ रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी शामिल हैं। विंग में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति अंतर्गत पंचकर्म द्वारा ज्वाइंट डिस्आर्डर, पथरी, आर्थराइटिस, पेटरोग, त्वचा रोग, ऑटोइम्यून डिसआर्डर के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। आलम यह है कि प्रतिदिन की कुल ओपीडी का औसतन 35 प्रतिशत लोगों का इलाज आयुष विंग में हो रहा है।

आयुर्वेद हमारे देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है इसके साइड इफेक्ट कम ही हैं। इसके कारण लोगों को एक तसल्ली रहती है। दूसरा प्रमुख कारण यह है कि जिस प्रकार से अंग्रेजी या एलोपैथ की दुनिया बेलगाम होती जा रही है, दवा महंगी होती जा रही है, इलाज महंगा हुआ है इसके कारण भी लोगों का मोहभंग हो रहा है। लोग खुद बताते हैं कि इस देश में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जिस प्रकार से सरकारें उदासीन हैं, इसका परिणाम यह हो गया है कि सेवा का यह क्षेत्र उद्योग बन चुका है जहां प्राफिट ही सबकुछ है। एक बीमार आदमी ग्राहक के रूप में ट्रीट किया जा रहा है वर्तमान में ये दोनों सेक्टर पूरी तरह से बेलगाम हो गए हैं।

पुरुषों की संख्या ज्यादा
विशेषज्ञ चिकित्सक अमित मिश्रा ने बताया कि आयुष विंग में इलाज के लिए पहुंचने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। वर्ष 2016-17 (मार्च तक) में 2180 महिलाएं तो वहीं 2367 पुरुष, 2017-18 ( मार्च तक) में 2272 महिलाएं तो 2541 पुरुष इलाज के लिए पहुंचे। वही 16-17 में 771 बालक और 681 बालिका, 17-18 में 831 बालक तो 756 बालिकाओं का इलाज हुआ।

इसके मरीज आए ज्यादा
पंचकर्म विशेषज्ञ डा. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि आयुष विंग में आंत्रशोध, फीवर, डायरिया, चर्मरोग, स्त्रीरोग, वातरोग, खांसी-कफ, डायबिटीज, ईएनटी, दंतरोग, स्वांस रोग, किडनी बीमारी स्टोन्स, कृमिरोग, हृदयरोग, नेत्ररोग, यौनरोग, टीबी, मानसिक रोग, फाइलेरिया, पाइल्स आदि के मरीजों की संख्या बढ़ी है और इनका सफल इलाज आयुर्वेदिक पद्धति से किया जा रहा है।

-लोगों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास एक बार फिर से जाग गया है। हलांकि ऐसे मरीज भी आते हैं जो एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवा दोनों साथ लेना चाहते हैं, लेते भी हैं और राहत है बताते हैं। मरीजों की संख्या देखकर यही लगता है कि देश एक बार फिर से आयुर्वेद की ओर तेजी से मुखर हो रहा है। डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, पंचकर्म विशेषज्ञ

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