#Topic Of The Day- असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का न्यूनतम वेतन हो 18 हजार रुपए : सिंह

#Topic Of The Day- असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का न्यूनतम वेतन हो 18 हजार रुपए : सिंह

Vasudev Yadav | Publish: Feb, 15 2018 07:32:42 PM (IST) Korba, Chhattisgarh, India

- बजट में ठेका, संविदा और पब्लिक सेक्टर के मजदूरों की उपेक्षा की गई है।

कोरबा . सरकार से हम लोग बहुत उम्मीद लगा बैठे थे, लेकिन बजट ने घोषणाओं पर पानी फेर दिया। बजट में ठेका, संविदा और पब्लिक सेक्टर के मजदूरों की उपेक्षा की गई है। किसी भी वर्ग के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया है। यह कहना है अखिल भारतीय कोयला खदान मजदूर संगठन बिलासपुर के अध्यक्ष संजय सिंह का। गुरुवार को संजय पत्रिका डॉट कॉम की ओर से आयोजित टॉपिक ऑफ डे कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरकार से मजदूर को बड़ी उम्मीद थी। हम लोगों ने सोचा था कि सरकार का अंतिम पूर्ण कालिक बजट है। इसमें बड़ी घोषणा हो सकती है, लेकिन बजट उम्मीद के विपरीत रहा।

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बजट में ठेका, संविदा और पब्लिक सेक्टर के मजदूरों की उपेक्षा हुई। सरकार ने 12-12 घंटे तक काम करने वाले आंगनबाड़ी और आशा मजदूरों के लिए कुछ नहीं किया। आज भी चार हजार रुपए मानदेय मिल रहा है। इस महंगाई में इतनी कम राशि से क्या होगा? उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए किया जाना चाहिए।

संजय ने कहा कि सत्ता में आने से पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली कहते थे कि पांच लाख रुपए की आय तक कोई कर नहीं लिया जाना चाहिए। सत्ता के आने वाद जेटली भूल गए। स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। उल्टा एक फीसदी सेस बढ़ा दिया। संजय ने रक्षा क्षेत्र में शत फीसदी एफडीआई का विरोध भी किया। इसे भारत की संप्रभुत्ता के लिए खतरा बताया।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के बजट का विरोध जारी है। मजदूर संघ ने 20 फरवरी को बजट के विरोध में काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। मजदूरों की नाराजगी से प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया है। 25 फरवरी तक कोई फैसला नहीं हुआ तो २६ फरवरी को नेशनल लेबर कांफ्रेंस का विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजना धरातल पर नहीं उतर रही है। फाइलों में दौड़ रही है।

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