दिवाली के पहले 'लाइफ लाइन' ने पांच मासूम बच्चों के जीवन में भर दी खुशियां

Life Line Express: पिता बेटी के इलाज के लिए पैसे जुटा ही रहा था कि इधर लाइफ लाइन एक्सप्रेस (Life Line Express) की आने की खबर मिली। किसान खुशी से झूम उठा जब लाइफ लाइन की महत्ता के बारे में पता चला। किसान बेटी की इलाज के लिए पसान से कोरबा पहुंचा। फिर...

कोरबा. मोतियाबिंद (Cataract) यानी ऐसी स्थिति, जिसमें बढ़ती उम्र के साथ आंख की पारदर्शिता लेंस धुंधली हो जाती है और दृष्टि कम हो जाती है। एक स्थिति ऐसी भी आती है, जब कुछ भी नहीं दिखता है। इसके इलाज के लिए मोतियाबिंद या कैटरैक्ट (Cataract) का ऑपरेशन किया जाता है। यह बीमारी न सिर्फ बढ़ती उम्र के साथ होती है, बल्कि कुछ नवजात बच्चों में भी पाई जाती है। समय पर पता नहीं चलने से यह बीमारी बच्चों के विकास में बाधा बनती है।

जिले में पहुंची लाइफ लाइन एक्सप्रेस में आंखों की जांच के दौरान पांच बच्चे ऐसे भी मिले हैं, जिनकी आंखों की रोशनी सामान्य से कम थी। इसमें ११ साल की प्रिया भी शामिल है। प्रिया और उसके माता पिता को बीमारी का पता उस वक्त चला जब प्रिया को पढ़ाई में परेशानी होने लगी। प्रिया पुस्तक को आंख के करीब रखकर पढऩे लगी। प्रिया की नजर कमजोर होने की जानकारी मिलते ही माता-पिता परेशान हो गए। प्रिया के पिता धरम दास बेटी को लेकर पेंड्रा के सरकारी अस्पताल पहुंचे। आखों की मेडिकल जांच की गई।

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पता चला कि प्रिया के दाएं आंख में मोतियाबिंद है। एक निजी डॉक्टर ने प्रिया के इलाज पर 30 से 40 हजार रुपए खर्च होने की जानकारी दी। प्रिया के पिता पेशे से किसान हैं। विकासखंड पोड़ीउपरोड़ा अंतर्गत पसान क्षेत्र का निवासी है। बेटी की इलाज कराने के लिए पिता धरम दास पैसे एकत्र कर रहे थे। इस बीच कोरबा में लाइफ लाइन एक्सप्रेस के आने की खबर मिली। उन्होंने इलाज के लिए प्रिया का रजिस्ट्रेशन कराया। मेडिकल जांच के बाद शुक्रवार को लाइफ लाइन एक्सप्रेस में प्रिया के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया।

धरम दास विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत पसान क्षेत्र के निवासी हैं। प्रिया कक्षा छठवीं में पढ़ती है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर रामकिशोर शांडिल्य ने बताया प्रिया को जन्म से मोतियाबिंद था। कोरबा में जांच के दौरान अभी तक मोतियाबिंद से ग्रसित पांच नाबालिग किशोर का ऑपरेशन किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों में यह बीमारी जन्म से होती है। इससे बच्चों को काफी परेशानी होती है। मेडिकल जांच में एक ऐसा बच्चा भी मिला है, जिसकी आंखों की रेटिना सही तरीके से विकसित नहीं हुई है। बच्चे को रेटिना स्पेशलिस्ट को रेफर किया गया है। लाइफ लाइन एक्सप्रेस में तीन दिन में लगभग 350 मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा चुका है। सभी मरीज आर्थिक तौर पर कमजोर हैं।

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Vasudev Yadav
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