20 लाख रुपए के हरे सोने से लदा ट्रक हुआ लापता, पढि़ए खबर

20 लाख रुपए के हरे सोने से लदा ट्रक हुआ लापता, पढि़ए खबर

Rajkumar Shah | Updated: 27 Jan 2018, 08:19:17 PM (IST) Korba, Chhattisgarh, India

वन विभाग के गोदाम से तेंदू पत्ता लेकर पश्चिम बंगाल मालदा के लिए निकला ट्रक लापता हो गया है।

कोरबा . वन विभाग के गोदाम से तेंदू पत्ता लेकर पश्चिम बंगाल मालदा के लिए निकला ट्रक लापता हो गया है। गाड़ी पर 20 लाख 80 हजार रुपए का तेंदू पत्ता लोड है। पुलिस ड्राइवर और गाड़ी मालिक की पतासाजी कर रही है।

इस मामले में पुलिस ने ट्रक चालक कमलेश सिंह और गाड़ी मालिक गुरुदयाल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। उनकी तलाश जारी है। दोनों अंबिकापुर के निवासी हैं। रिपोर्ट बिलासपुर हाई कोर्ट रोड निवासी संदीप केडिया ने लिखाई है। इसमें बताया गया है कि संदीप,

सुनिता नेचुरल फारेस्ट प्रोडक्ट प्राईवेट लिमिटेड बिलासपुर का डायरेक्टर है। वन विभाग से तेंदु पत्ता क्रय कर ट्रांजिट प्ररमिट के माध्यम से दूसरे राज्यों में बिक्री करता है। उसने 13 जनवरी को ट्रक सीजी 15 एसी 3889 पर 310 बोरी तेंदू पत्ता मालदा (पश्चिम बंगाल ) भेजा था।

तेंदु पत्ता कोसाबाडी कोरबा के एनसीडीसी गोदाम से लोड किया गया था। 10 दिन बित गए लेकिन तेंदू पत्ता मालदा नहीं पहुंचा। संदीप ने ट्रक मालिक से सम्पर्क किया। उसका फोन नहीं लगा।

ड्राइवर से भी सम्पर्क करने की कोशिश की। पतासाजी करने पर मालूम हुआ कि दोनों अंबिकापुर के निवासी हैं। संदीप को संदेह है कि उनके साथ ठगी हुई है।

गाड़ी मालिक ने खुद फोन करके गाड़ी पर तेंदू पत्ता लोड कराने के लिए संदीप को राजी किया था। उसने मामले की शिकायत कोतवाली थाने में की है। पुलिस ने जांच के बाद कोतवाली थाने में केस दर्ज किया है। गाड़ी पर लोड तेंदू पत्ता की कीमत 20 लाख 80 हजार 338 रुपए बताई गई है।


बीड़ी बनाने में उपयोग- बता दे कि तेंदू पत्ता का उपयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है। बीड़ी बनाने वाली कंपनियां तेंदू पत्ता खरीदती हैं। कोरबा जिले में बड़े पैमाने पर तेंदू पत्ता का संग्रहण होता है। इसे हरा सोना के नाम से जाना जाता है।

कोरबा और कटघोराा वनमंडल में तेंदू पत्ता की गुणवत्ता अच्छी होती है। वन विभाग सोसाइटियों के जरिए वन से तेंदू पत्ता का संग्रहण करता है। इसे एकत्र कर गोदाम में रखा जाता है। फिर बीड़ी बनाने वाली कंपनियों को बेचा जाता है। तेंदू पत्ता के संग्रहण से ग्रामीणों को हर साल आमदनी होती है।

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