scriptNirupama of Korba fought against Coal India limited | छत्तीसगढ़ की इस आदिवासी महिला के संघर्ष के आगे झुकी कोल इंडिया की साथी कंपनी SECL, महाप्रबंधक को करनी पड़ी मिन्नतें | Patrika News

छत्तीसगढ़ की इस आदिवासी महिला के संघर्ष के आगे झुकी कोल इंडिया की साथी कंपनी SECL, महाप्रबंधक को करनी पड़ी मिन्नतें

महाप्रबंधक ने कोरबा जिला प्रशासन को बताया कि खदान में महिलाएं नौकरी की पात्र नहीं हैं। तब निरुपमा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने निरुपमा के पक्ष में फैसला दिया।

कोरबा

Published: February 21, 2022 01:35:00 pm

राजेश कुमार@कोरबा. इरादे नेक हों तो सपने साकार होते हैं। 25 साल के संघर्ष के बाद एक आदिवासी महिला ने कोल इंडिया की साथी कंपनी एसईसीएल (SECL) को अपनी नीति में बदलाव के लिए विवश कर दिया। आज महिला कंपनी के महाप्रबंधक कार्यालय में नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रही है। इस संघर्ष की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी, जब निरुपमा के पिता धजाराम की ग्राम बरकुट में स्थित 5.25 एकड़ पुश्तैनी जमीन का अधिग्रहण कोयला खनन के लिए एसईसीएल ने किया था।
इस आदिवासी महिला के संघर्ष के आगे झुकी कोल इंडिया की साथी कंपनी SECL, महाप्रबंधक को करनी पड़ी मिन्नतें
इस आदिवासी महिला के संघर्ष के आगे झुकी कोल इंडिया की साथी कंपनी SECL, महाप्रबंधक को करनी पड़ी मिन्नतें
जमीन के बदले नहीं मिली धजाराम के पुत्र को नौकरी
जमीन के बदले नौकरी की पात्रता होने के बाद भी धजाराम को कंपनी ने काम नहीं दिया। इस बीच उनकी मौत हो गई। दिव्यांग होने से कंपनी ने धजाराम के पुत्र को नौकरी के लिए अपात्र घोषित कर दिया। तब तक तीन बेटियों की शादी हो गई थी।
शादीशुदा बताकर बेटियों को भी रखा नौकरी से वंचित
कंपनी ने शादीशुदा बताकर तीनों बेटियों में से किसी को भी जमीन के बदले नौकरी देने से मना कर दिया। तब मैं आगे आई। मैंने नौकरी के लिए संघर्ष शुरू किया। कंपनी में चार बार आवेदन किया और कोयला कंपनी को अपनी जमीन पर कब्जा नहीं करने दिया।
कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कंपनी को जब जमीन पर कब्जा नहीं मिला तो खदान विस्तार की समस्या खड़ी हो गई। कुसमंडा के तत्कालीन महाप्रबंधक निरुपमा से मिलने पहुंचे और निरुपमा को नौकरी दिए जाने की सिफारिश प्रबंधन से की। लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया। फिर महाप्रबंधक ने कोरबा जिला प्रशासन को बताया कि खदान में महिलाएं नौकरी की पात्र नहीं हैं। तब निरुपमा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने निरुपमा के पक्ष में फैसला दिया। कोयला कंपनी को नौकरी देने के लिए कहा। 25 साल बाद मई, 2021 में कंपनी निरुपमा को जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी देने को तैयार हो गई।

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