सीजेएम के आदेश को एडीजे कोर्ट ने पलटा, कोरबा पूर्व के सीई पर केस चलाने का आदेश, ये है वजह...

दो लोगों को नाजमद आरोपी बनने के लिए कहा है। इसमें पहला कोरबा थर्मल पॉवर प्लांट के भार साधक अधिकारी और दूसरा आरोपी प्लांट के मुख्य अभियंता एनएस रावत को बनाया गया है।

By: Shiv Singh

Published: 19 Jan 2019, 10:53 AM IST

कोरबा. कोरबा थर्मल पॉवर प्लांट से उत्सर्जित होने वाली राख का उपयोग करने में नाकाम प्रबंधन के खिलाफ एडीजे कोर्ट ने वायु प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण के नियमों की उल्लंघन का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। दो लोगों को नाजमद आरोपी बनने के लिए कहा है। इसमें पहला कोरबा थर्मल पॉवर प्लांट के भार साधक अधिकारी और दूसरा आरोपी प्लांट के मुख्य अभियंता एनएस रावत को बनाया गया है। चार फरवरी को मामले की अगली सुनवाई चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में होगी।

पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिवक्ता लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने बताया कि कोरबा थर्मल पॉवर प्लांट में प्रतिदिन तीन हजार ५०० टन कोयले की खपत है। कुल खपत का ४२ फीसदी राख निकलता है। औसत एक हजार ४७० टन उत्सर्जित होती है। उद्योग द्वारा लगातार वायु प्रदूषण किया जा रहा है। प्लांट राख की उपयोगिता में फेल हुआ है।

प्रबंधन को सितंबर २००६ से अगस्त २००७ तक कुल उत्सर्जित राख का ५१ फीसदी हिस्सा उपयोग करना था। २००८ तक प्लांट को ५८ फीसदी राख का उपयोग करने के लिए पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कहा था। उपयोग को लेकर संरक्षण मंडल ने प्लांट को समय-समय पर केन्द्र सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन को बताया था। इसके बाद भी प्रबंधन ने राख की उपयोगिता सुनिश्चित करने में गंभीरता नहीं दिखाई। सितंबर २००६ से अगस्त २००७ तक २.१४ फीसदी राख का उपयोग किया गया। इस पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कोरबा थर्मल पॉवर प्लांट के खिलाफ कोरबा के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्टे्रट की कोर्ट में परिवाद दायर किया था।

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प्रबंधन के भार साधक अधिकारी व मुख्य अभियंता एनएस रावत को आरोपी बनाने की मांग की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने परिवाद को निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ संरक्षण मंडल के अधिवक्ता ने अपर सत्र न्यायाधीश विशेष कोर्ट योगेश पारिक की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सीजेएम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए थर्मल पॉवर प्लांट भार साधक अधिकारी और मुख्य अभियंता एनएस रावत के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

एनजीटी के आदेश के बाद भी नहीं चुकाया जुर्माना
राख की उपयोगिता में फेल होने एनजीटी ने भी कोरबा जिले में स्थित ११ बिजली घरों पर लाखों रुपए जुर्माना लगया था। इसमें एनटीपीसी, बालको, सीएसईबी, लैंको और स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमिटेड शामिल है। इन संयंत्रों की राख उपयोगिता बेहद कम है। ग्रिन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी कंपनियों ने जुर्माना की राशि नहीं चुकाया है। एनजीटी की फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। एनजीटी ने पर्यावरण विभाग को जुर्माना वसूलने का आदेश दिया था।

संरक्षण मंडल की दलील
कोर्ट में संरक्षण मंडल के अधिवक्ता की दलील थी कि मानकों की अनदेखी से कोरबा में वायु व जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इसका प्रभाव अंचल की लोगों के अलावा पेड़ पौधोंं पर पड़ रहा है। किसान की फसल पर भी कुप्रभाव पड़ा है।

Shiv Singh Desk
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