मिडिल से ही कमजोर बच्चों पर फोकस की तैयारी, हाईस्कूल के लेक्चरर करेंगे पहचान

लेक्चरर(व्याख्याता) अब अपने समीप स्थित मिडिल स्कूल जाएंगे

By: Shiv Singh

Published: 25 Nov 2018, 02:08 PM IST

कोरबा. हाई स्कूलों में पदस्थ लेक्चरर(व्याख्याता) अब अपने समीप स्थित मिडिल स्कूल जाएंगे। इतना ही नहीं वह मिडिल स्कूल की पूरी शैक्षणिक गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन करेंगे। वहां पढ़ाई में कमजोर बच्चों को चिन्हांकित करेंगे। कमजोर बच्चों को चिन्हांकन के बाद उनके बारे में प्रधान पाठक के साथ ही उनकी जानकारी प्राचार्यों को भी दी जाएगी। फिर कमजोर बच्चों के व्यक्तित्व क्या सुधार हुआ इसकी मॉनिटरिंग होगी।


डीईओ सतीश कुमार पाण्डेय ने हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक लेकर इस कार्ययोजना को विस्तापूर्वक उन्हें समझाया है। इस तरह की दो बैठकों 22 और 24 नवंबर को ली गईं। जिसमें कई तरह के नए प्रयोग और शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए कार्ययोजना से प्राचार्यों को अवगत कराया गया है।

अब हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में पदस्थ सभी व्याख्याता अपने-अपने स्कूल के समीप आने वाले मिडिल स्कूलों में माह में एक दिन बिताएंगे और वहां के शिक्षा का स्तर सुधारने का प्रयास करेंगे। कमजोर बच्चों पर फोकस करने को कहा गया है। इसके अलावा निजी स्कूल के संस्था प्रमुखों की भी अलग से बैठक ली गई। जिसमें उन्हें 2011 से लेकर अब तक शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेशित छात्रों के रिकॉर्ड संधारित करने के निर्देश दिए गए।

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बैठक में हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में 100 बिन्दुओं वाले प्रपत्र कि समीक्षा भी की गई। इस प्रपत्र के अनुसार दिए गए अंकों के आधार पर स्कूलों को ग्रेड दिया जाना था। लेकिन इसमें प्राचार्यों ने चूक कर दी। जरूरत से ज्यादा अंक दे दिए गए हैं। इसलिए अब प्राचार्यों को हिदायत दी गई है कि ईमानदारी से अंक प्रदान करें।

यह समीक्षा हर महीने की जानी है। इसके अलावा छ:माही परीक्षाओं के आयोजन के विषय में भी जानकारी देते हुए आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने को कहा गया। इसके अलावा छमाही परीक्षा के आयोजन को लेकर भी तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्यों को इसके लिए सिलेबर्स जल्द पूरा कर लेने के आदेश जारी किये गए हैं।


एकेडमिक कंट्रोल प्राचार्यों को
डीईओ ने 22 नवंबर को ही एक आदेश जारी कर एक ही परिसर(500 मीटर के भीतर) में संचालित विद्यालयों का एकेडमिक कंट्रोल वहां के उच्च संस्था प्रमुख को सौंपा दिया है। जिसका मतलब यह हुआ कि 500 मीटर की परिधी में आने वाले प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं की विद्यार्थियों का लर्निंग आउट कम,

अंतर्निहित गुणों के विकास के लिए संचालित गतिविधियां, लिखित अभ्यास, प्रति माह शिक्षक-पालक बैठक आदि के मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्यांे की होगी। प्राचार्य अपने 500 मीटर के क्षेत्रफल वालो सभी स्कूलों के समस्त शासकीय योजनाओं का भी पर्यवेक्षण करेंगे। हालांकि वित्तीय प्रबंधन में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। वह पूर्व की भांति ही संचालित रहेंगे।


निष्क्रिय प्राचार्यों के फूल रहे हांथ-पांव
शनिवार को बैठक बुलाए जाने पर ही कई प्राचार्य बेहद खिन्न दिखे। वह शनिवार को मॉर्निंग स्कूल के सीधे घर जाना चाहते हैं। लेकिन डीईओ उन्हें लगभग हर हफ्ते बैठक में बुला लेते हैं। प्राचार्यांे को स्कूलों के एकेडमिक अधिकार के साथ ही यू डाईस, 100 बिन्दु वाले प्रपत्र जैसे कई तरह के योजनाओं का नोडल बनाकर अहम जिम्मेदारी दी गई है। अब ना चाहते हुए भी उन्हें सक्रियता से काम करना पड़ रहा है। ऐसे प्राचार्या संसाधनों को रोना रो रहे हैं, काम करने के डर से उनके हांथ-पांव फूल रहे हैं।

Shiv Singh Desk
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