चार सालों से ख्याली ट्रेन चलाते रहे कोरबा से रेणुकूट व्हाया अंबिकापुर रेल लाइन पर

उर्जाधानी को प्रदेश के पड़ोसी राज्यों से जोडऩे के लिए उत्तरप्रदेश के रेणुकूट तक रेल मार्ग की परिकल्पना चार वर्ष बाद भी अधूरी है। रेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर बड़े-बड़े दावे तो हुए लेकिन कोरबा से रेणुकूट व्हाया अंबिकापुर रेल लाइन का मुद्दा कहीं खो गया, बात सर्वे तक ही सिमट कर रह गई।

By: Vasudev Yadav

Published: 10 Apr 2019, 11:03 AM IST

केारबा. वर्ष २०१४-१५ में कोरबा से रेणुकूट व्हाया अंबिकापुर की ३३१ किमी लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना थी। इसके लिए सर्वे भी किया गया था। इस मार्ग में ऐसे कई गांव सहित दुर्गम क्षेत्र आते हैं जो कि देश आजाद होने के बाद से लेकर अब तक रेल नेटवर्क से अछूते हैं। जिसके कारण ही इस परियोजना को स्वीकृत कर सर्वे किया गया था। इस मार्ग के साथ ही रेल कनेक्टिविटी के विस्तार के मामले में उर्जाधानी लंबे समय से उपेक्षाओं का दंश झेल रहा था।

अंबिकापुर तक के लिए नहीं है रेल लाइन
फिलहाल कोरबा से अंबिकापुर और इस दिशा में रमानुजगंज से होते हुए झारखण्ड तक कोई रेल नेटवर्क नहीं है। जबकि इस क्षेत्र में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा है। फिर चाहे वह सस्तें दरों पर काम करने वाले मजदूर हों या फिर नौकरीपेशा लोग। सभी कोरबा से अंबिकापुर होते हुए झारखण्ड, बिहार व यूपी तक का सफर करते हैं। दुर्भाग्यवश इस दिशा में कोई भी रेल नेटवर्क नहीं है। लोगों के पास सडक़ मार्ग से सफर करने के अलावा और कोई भी विकल्प नहीं है। इसी मार्ग पर अंबिकापुर से गढ़वा तक की १७० किमी लंबी रेल लाइन का भी सर्वे किया गया था। जिसका हाल भी कोरबा-रेनुकूट जैसा ही है।

इतना राजस्व कोरबा से
वर्तमान में उर्जाधानी से औसतन ३४ रैक कोयले का डिस्पैच प्रतिदिन किया जा रहा है। पीक सीजन में यह औसत ४० से ४५ तक भी पहुंच जाता है। एक रैक में ५८ वैगन होते हैं। प्रत्येक वैगन में औसतन ८७ टन कोयला भरा जाता है। राज्य के बाहर कोयल से लदी प्रत्येक रैक के परिवहन के एवज में रेलवे को ३० लाख रुपए का भाड़ा एसईसीएल से प्राप्त होता है। जिसका अर्थ यह हुआ कि जिले में केवल कोयला लदान से ही रेलवे को हर दिन औसतन १० करोड़ २० लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।

इन परियोजनओं का निर्माण जिले से है प्रस्तावित
पिछले वर्ष केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल जिले के प्रवास पर आए थे। जिन्होंने रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसमें से पहली खरसिया से धरमजयगढ़ तक १०४ किलोमीटर नई लाइन पर काम चल रहा है। दूसरे चरण में धरमजयगढ़ से उरगा के बीच ६३ किलोमीटर नई लाइन पर काम अब शुरू होगा। पहले चरण की लागत लगभग ३०५५ करोड़ व द्वितीय चरण की लागत १६८६ करोड़ है। जबकि दूसरी परियोजना गेवरारोड से पेंड्रा रोड तक १३५ किलोमीटर नई लाइन का निर्माण किया जा रहा है। जिसका काम शुरू हो चुका है। इन दोनों स्टेशन के मध्य कुल नौ स्टेशन बनेंगे। इस परियोजना की कुल लागत ४९७० करोड़ रूपए है। तीसरी परियोजना कटघोरा से करतली तक बनने वाली २२ किलोमीटर व करतली से मुंगेली, कवर्धा व खैरागढ़ के बीच २५५ किमी की रेल लाईन है। जिसकी लागत ५९५० करोड़ रुपए है। कटघोरा से एक लाईन पेंड्रा की ओर भी जाएगी तो दूसरी लाइन करतली होते हुए डोंगरगढ़।

Vasudev Yadav
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