रोजी-रोटी के लिए बाहर कमाने गए छह मजदूर ट्रक पर सवार होकर लौट रहे थे गांव, हाटी मार्ग पर निरीक्षण दल ने रोका

Lockdown: कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है, लेकिन बाहर कमाने-खाने गए मजदूर के पास रोजी-रोटी की समस्या आन पड़ी है। इससे मजदूर किसी भी माध्यम से घर लौटने पलायन कर रहे हैं।

By: Vasudev Yadav

Published: 30 Mar 2020, 11:07 AM IST

कोरबा. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने देश में 14 अप्रैल तक घोषित लॉकडाउन के चलते उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के छह प्रवासी कामगारों को नायब तहसीलदार पवन कोसमा ने कुदमुरा के अस्थायी पुनर्वास केन्द्र में पहुंचाया है। इन प्रवासी कामगारों को यहां अब 14 अप्रैल तक रखा जाएगा। इनके स्वास्थ्य परीक्षण और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है।

रविवार सुबह ही कलेक्टर किरण कौशल ने जिले की सीमा में आने वाले प्रवासी कामगारों को उनके गन्तव्य तक जाने नहीं देने और उन्हें कोरबा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में ही रखने के निर्देश दिए थे। यह छह कामगार उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले से विशाखापट्टनम काम के सिलसिले में गए थे। इस दौरान नायब तहसीलदार सोनू अग्रवाल और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एसएस रात्रे भी मौजूद रहे।

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नायब तहसीलदार पवन कोसमा ने बताया कि अपनी टीम के साथ वे कुदमुरा क्षेत्र में प्रवास पर थे। कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने और नियंत्रित करने के लिए गांव-गांव में निरीक्षण एवं जागरूकता आदि का काम तेजी से प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इसी सिलसिले में पवन कोसमा अपनी टीम के साथ कुदमुरा की तरफ जा रहे थे। हाटी सड़क पर कोरबा की तरफ आने वाले ट्रक पर यह छह कामगार सवार थे।

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आजमगढ़ जिले के नान्हूपुर ग्राम निवासी रामनारायण यादव, लारपुर गांव के निवासी अवधेश यादव, बबलू यादव, संजय यादव और विशाल यादव तथा सरेया गांव निवासी गौतम पाल को इस निरीक्षण दल ने ट्रक रोककर पूछताछ के लिए उतारा।

इन कामगारों ने बताया कि वे अपने गांव से विशाखापट्टनम रोजी-रोटी कमाने गए थे। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने के कारण काम बंद हो जाने से उन्हें वापस लौटना पड़ा। रेलगाड़ी बंद होने के कारण वे किसी तरह लिफ्ट आदि लेकर रायगढ़ के रास्ते हाटी होते हुए यहां तक पहुंचे हैं।

जानकारी मिलने पर इन प्रवासी कामगारों को तत्काल कुदमुरा के प्री मै. आदिवासी बालक छात्रावास के अस्थायी पुनर्वास केन्द्र के लिए भेजा गया। केन्द्र में इनके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल टीम बुलाई गई है। साथ ही इनके भोजन, पानी की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है।

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