भारत सरकार इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुनील बर्थवाल ने जिला स्तर के अधिकारियों की ली समीक्षा बैठक

Vasudev Yadav

Publish: Dec, 07 2017 01:23:10 PM (IST) | Updated: Dec, 07 2017 04:44:20 PM (IST)

Korba, Chhattisgarh, India
भारत सरकार इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव  सुनील बर्थवाल ने जिला स्तर के अधिकारियों की ली समीक्षा बैठक

केन्द्र की योजनाओं में जिला काफी पिछड़ा हुआ है। खासकर तीन प्रमुख योजना पीएम आवास, उज्ज्वला और जिला खनिज न्यास मद।

कोरबा . भारत सरकार इस्पात मंत्रालय नई दिल्ली के संयुक्त सचिव सुनील बर्थवाल ने गुरुवार को सवेरे नौ बजे से कलेक्टोरेट सभाकक्ष कोरबा में जिला स्तर के अधिकारियों की समीक्षा बैठक लिए। मीटिंग में कलेक्टर मो. केसर अब्दुल हक सीईओ जिला पंचायत इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, आयुक्त न.नि. रणबीर शर्मा डीएफओ कोरबा, कटघोरा के अलावा सभी जिला स्तर के अधिकारी मौजूद थे।

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केन्द्र की योजनाओं में जिला काफी पिछड़ा हुआ है। खासकर तीन प्रमुख योजना पीएम आवास, उज्ज्वला और जिला खनिज न्यास मद। इन तीनों में कहीं तेजी से काम चल रहा है तो अफसर गड़बड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं और उन पर नियंत्रण नहीं है।

भारत सरकार इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव  सुनील बर्थवाल ने जिला स्तर के अधिकारियों की ली समीक्षा बैठक

पीएम आवास : लक्ष्य साढ़े 24 हजार का बने सिर्फ 5800
पीएम आवास योजना मेंं कोरबा जिले को लक्ष्य 24 हजार 765 का दिया गया था। लेकिन इसमेंं अब तक सिर्फ 5818 आवास की ही हैं। इसमें से पांच सौ मकान अब पूर्णता की ओर है। पीएम आवास की चाल जिले में शुरू से ही पिछड़ी हुई है। शुरूआत के एक साल तक सिर्फ 12 सौ ही मकान बनाए गए। बाद में अब आनन-फानन में चार हजार मकान बनाए गए। कई जगह से गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायतें है। कोरबा ब्लॉक को सबसे अधिक 6690 मकान बनाने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन इसमें भी सिर्फ 1500 मकान ही पूरे हो सके है। इसी तरह करतला में 1053, कटघोरा में 742, पाली में 1577 व पोड़ीउपरोड़ा में 1001 मकान ही पूर्ण हो सका है।

 

उज्ज्वला योजना : कनेक्शन 60 हजार को, रिफलिंग सिर्फ 9 हजार
जिले में उज्ज्वला योजना के तहत 60 हजार परिवारों को अब तक गैस कनेक्शन दिया गया। बकायदा सिलेंडर के साथ चुल्हा भी दिया गया है। इस योजना का मकसद लकड़ी, कोयले की बजाए एलपीजी से खाना बनाने पर जोर देना है। इस योजना के पीछे अब 25 करोड़ रूपए से अधिक खर्च हो चुका है। लेकिन रिफलिंग महज 9 हजार गैस सिलेंडरों की ही हुई है। साफ है कि 51 हजार सिलेंडर लोगों के घर खाली पड़े हुए है। योजना का मकसद सिर्फ कनेक्शन देना ही नहीं बल्कि उसकी नियमित रिफलिंग कर उपयोग भी करना है। इसके लिए जिले में लकड़ी और कोयले की चोरी पर लगाम लगाना जरूरी था। शुरूआत में कारवाई हुई, लेकिन बाद में यह भी ठप पड़ गया।

जिला खनिज न्यास मद: फिजूल व अपव्यय पर आमादा अधिकारी
जिला खनिज न्यास मद के अन्र्तगत राशि तो अरबों में मिली। लेकिन उसके उपयोग के तौर-तरीकों को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं। अधिकतम राशि का उपयोग भूविस्थापितों के पुनर्वास और कल्याण तथा खदान प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों पर व्यय होनी थी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा इस मद की राशि का अपव्यय भी हो रहा है। मसलन लोक सुराज अभियान में सीएम के आगमन पर ही अधिकारियों ने 81 हजार रूपए का एक दिन में बैलून फोड़ दिया। तो वहीं कलेक्ट्रोरेट में लाखों की लागत से रैन बसेरा बनाया गया, जो ऊपर से खुला हुआ है, बैठने के लिए सिर्फ पांच सीट है। पूर्व में ऐसे छात्रावास जिनमें भ्रष्टाचार हुआ था।

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