नाबालिग से दुष्कर्म मामले में बालक को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने ये कहा

Rape Case: बालक ने नाबालिग लड़की को प्रेमजाल में फंसाकर किया था शारीरिक शोषण, लड़की के गर्भवती होने पर दवा खिलाकर गर्भपात कराने की गई थी कोशिश।

By: Vasudev Yadav

Published: 08 Dec 2019, 01:12 PM IST

कोरबा. शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने वाले विधि विरूद्ध अपचारी बालक को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जमानत के लिए कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने खारिज कर दिया।

अभियोजन पक्ष ने बताया कि शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में 15 साल के किशोर पर केस दर्ज किया गया था। अपचारी बालक की ओर से किशोर न्याय बोर्ड में जमानत के लिए याचिका लगाई गई थी। इसमें बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अपचारी बालक को झूठे मामले में फंसाया गया है। उसके द्वारा कोई अपराध नहीं किया गया है। अपचारी बालक अपने माता-पिता के साथ रहता है। वर्तमान में बाल संप्रेषण गृह में निरुद्ध है।

बचाव पक्ष ने अपचारी बालक के कोमल मन और संप्रेषण गृह में निरुद्ध होने से पडऩे वाले प्रभाव का हवाला देकर जमानत की मांग की थी। इसकी सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने बालक को जमानत नहीं दी थी। बचाव पक्ष ने निचली अदालत की फैसले को चुनौती उपरी अदालत में दी थी। इस पर सुनवाई हुई।

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अभियोजन पक्ष ने आरोपों को गंभीर बताया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपचारी बालक की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। प्रकरण का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने कहा कि अपचारी बालक ने नाबालिग लड़की को प्रेमजाल में फंसाकर तीन साल तक शोषण किया।

लड़की के गर्भवती होने पर दवा खिलाकर गर्भपात कराने की कोशिश की। जिन परिस्थितियों में बालक द्वारा यह अपराध किया गया है उससे प्रतीत होता है कि बालक के ऊपर माता-पिता का नियंत्रण नहीं है। बुरी संगत में पड़कर अपराध की ओर अग्रसर हुआ। ऐसे में उसे रिहा किए जाने पर अपराधियों के संगत में पड़कर पुन: अपराध की संभावना है।

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अपराध की परिस्थिति और गंभीरता को देखते हुए उपरी न्यायालय ने जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। अपचारी बालक के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 373, पास्को एक्ट की धारा 4-6 तथा अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार की धारा 3-2-5 के तहत केस दर्ज किया था। मामले की सुनवाई चल रही है।

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