खुद की परवाह किए बिना कोरोना के इस संकट काल में ये कोरोना वारियर्स घर-घर पहुंच दे रही बैंकिंग सुविधाएं

Banking: खाते से लेनदेन में नहीं हुई कोई परेशानी, दो माह में बीस हजार से अधिक खातों से हुआ दो करोड़ रूपए का लेनदेन

By: Vasudev Yadav

Published: 16 May 2020, 11:15 AM IST

कोरबा. कोरोना संक्रमण के कारण एक ओर जहां बैंकों में कामकाज सीमित हो गया है, बैंकों में भीड़ लगाने पर मनाही है, एटीएम मशीन काउंटरों पर सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन के मानक जरूरी किए गए हैं तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भी लोगों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो रही है।

ऐसी परिस्थितियों में भी पिछले दो महीने में कोरबा जिले के ग्रामीण इलाकों के बीस हजार 467 लोगों ने दो करोड़ दो लाख रुपए से अधिक का लेनदेन अपने बैंक खातों से घर बैठे कर लिया है। किसी ने पेंशन निकाली है, तो किसी ने मनरेगा की मजदूरी पाई है। कोरबा जिले में गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाओं को पहुॅंचाने के लिए 63 बैंक सखियों द्वारा लगातार काम किया जा रहा है।

घर-घर पहुॅंचकर लेपटॉप या छोटी सी हाथ से चलने वाली कियोस्क टाइप मशीन से यह बैंक सखियांं किसी महिला को वृद्धावस्था पेंशन की राशि दे रही हैं, तो किसी ग्रामीण को मनरेगा की मजदूरी का भुगतान भी कर रही हैं। बैंकों में जमा ग्रामीणों के रुपए उनके घर में पहुंचकर उन्हें आसानी से मिल जा रहे हैं। कोरबा जिले में वर्तमान में पॉंच बैंकों की 63 बैंक सखियॉं ग्रामीणों को नगद राशि निकालने, जमा करने, एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने जैसी सेवायें घर पहुॅंचकर दे रही हैं।

इन बैंक सखियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के नए खाते खोलने और उनके खाते में बचत राशि की जानकारी भी तत्काल दी जा रही है। जिले में पिछले दो महीनों में इन बैंक सखियों द्वारा 20 हजार 467 लोगों के बैंक खातों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है, जिनसे दो करोड़ दो लाख रुपए से ज्यादा का लेनदेन हो चुका है। बैंक सखियों ने पिछल दो महिने में छह हजार 941 पेंशन हितग्राहियों, दो हजार 293 मनरेगा मजदूरों, दो हजार 482 जनधन खाताधारकों और सात हजार सात सौ छियासी सामान्य खाता धारकों को कोरोना संक्रमण के इस दौर में घर पहुंचकर राशि उपलब्ध कराई है। इस दौरान मुंह पर मास्क लगाने के साथ-साथ सोशल डिस्टेसिंग का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

किसी बीमार के ईलाज के लिये तत्काल राशि उपलब्ध कराना हो तो बैंक सखी अपने लेपटॉप और मॉरफो डिवाईस या पॉस मशीन लेकर सीधे अस्पताल में भर्ती मरीज तक पहुंच जाती है और उसके अंगूठे के निशान से ही जरूरत की राशि उसके खाते से निकालकर तत्काल उपलब्ध करा देती है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस जयवर्धन ने बताया कि जिले में वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की 52, भारतीय स्टेट बैंक की 5, पंजाब नेशनल बैंक की 3 और यूनियन बैंक की एक और ओरिएन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स की 2 बैंक सखियॉं कार्यरत हैं। हर एक बैंक सखी का कार्यक्षेत्र तीन से पांच ग्राम पंचायतों को मिलाकर निर्धारित किया गया है।

ग्राम पंचायतों में निर्धारित जगहों पर भी उपस्थित रहकर यह बैंक सखियॉं लोगों को मनरेगा मजदूरी भुगतान, छात्रवृत्ति भुगतान, सामाजिक सुरक्षा पेंशनों का वितरण और अपने बैंक खातों में जमा रुपयों के लेनदेन-नगद निकासी-जमा की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।

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