World Population Day : हर साल जन्म व मृत्यु के आंकड़ों में हो रहा बदलाव, क्या कहते हैं आंकड़ें, पढि़ए खबर...

World Population Day : हर साल जन्म व मृत्यु के आंकड़ों में हो रहा बदलाव, क्या कहते हैं आंकड़ें, पढि़ए खबर...

Vasudev Yadav | Publish: Jul, 11 2019 08:00:00 AM (IST) | Updated: Jul, 11 2019 12:04:36 PM (IST) Korba, Korba, Chhattisgarh, India

प्रतिदिन जिले मेें 72 बच्चे जन्म ले रहे हैं वहीं औसतन प्रतिदिन 15 की जान जा रही है। जनवरी से लेकर अब तक 10946 बच्चों ने जन्म लिया है। वहीं अलग-अलग कारणों से 2257 की जान गई है।

कोरबा. जिला सांख्यिकी विभाग (Statistics department) में हुए जन्म व मृत्यु पंजीयन के आंकड़े के आधार पर अगर इसकी तुलना की जाए तो बीते साल 2017 में दोनों ही में कुछ कमी आई थी। हालांकि 2018 में सिर्फ ढाई हजार से ज्यादा बच्चों ने जन्म लिया है। 2016 व 2015 में बच्चे पैदा होने वालों की संख्या जहां 30 हजार से पार हो गई थी। तो वहीं इससे पहले 2013 में सबसे कम 23516 बच्चे पैदा हुए थे।

जनवरी से लेकर मई तक 10946 बच्चों ने जन्म लिया है। औसत निकाला जाए तो हर दिन 72 बच्चे जन्म ले रहे हैं। जबकि 2018 में भी यही स्थिति थी। औसतन 72 बच्चों ने जन्म लिया था। जबकि 2016 में प्रतिदिन 66 बच्चों ने जन्म लिया था। जबकि 2014 में रिकार्ड 98 बच्चे व 2015 में 81 बच्चों ने जन्म लिया था।

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वहीं मृत्यु पंजीयन के आंकड़े भी कुछ इस तरह ही है। ये जिले के लिए अच्छी बात है जब मौत के आंकड़ों में कमी आई है। पिछले पांच साल में सबसे अधिक 2016 में मौतें हुई थी। 7940 लोगों की मौत हुई थी। वहीं औसत साढ़े छह हजार लेागों की मौत हर साल हो रही थी। इस पर 2017 में सबसे कम मौतें हुई। 5232 लोगों की अलग-अलग वजहों से मौत हुई। 2018 में हालांकि आंकड़े कुछ बड़े जरूर है।

साढ़े सात साल में बढ़ी एक लाख 62 हजार जनसंख्या
बीते साढ़े 7 साल मेंं एक लाख 62 हजार बढ़ी जिले की जनसंख्या में इजाफा हुआ है। 2011 के जनगणना के मुताबिक जिले की जनसंख्या 12 लाख 6640 थी। जन्म पंजीयन के हिसाब से अभी जिले की जनसंख्या 13 लाख 68 हजार से ज्यादा हो चुकी है। हालांकि बाहर से काम करने कोरबा आए लोगों की संख्या भी मिलाकर लगभग १४ लाख के आसपास कोरबा की जनसंख्या है। बीते साढ़े सात साल में 2 लाख 97 हजार लोगों ने जन्म लिया। वहीं 47096 की मृत्यु हुई।

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जनसंख्या बढऩे के पीछे वजह
1. शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के दंपति शिक्षित कम होने से जागरूकता का अभाव
2. परिवार नियोजन को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां।
3. महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नसबंदी में कमी।

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