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एनएमपीएस केज परियोजना: मत्स्य बर्फ संयंत्र शीत गृह निर्माण सात साल से अधूरा पड़ा, मशीनरी कबाड़ होने लगीं

६५ लाख की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी, छत्तीसगढ़ मत्स्य महासंघ को निर्माण व मछली पालन विभाग को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मिली थी।

कोरीया

Updated: March 26, 2022 08:35:02 pm


बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ मत्स्य महासंघ रायपुर और मछली पालन विभाग की लापरवाही के कारण कोरिया का इकलौता मत्स्य बर्फ संयंत्र सह शीत गृह निर्माण अधर में लटका हुआ है। झुमका जलाशय के पास ६५ लाख की लागत से स्वीकृत संयंत्र पिछले सात साल से अधूरा पड़ा है। वहीं आधुनिक मशीनरी देखरेख के अभाव में कबाड़ होने लगी हैं। मत्स्य शीतगृह की क्षमता ६ मीट्रिक टन है।
जानकारी के अनुसार एनएमपीएस केज परियोजना के तहत वर्ष २०१५ में मत्स्य बर्फ संयंत्र सह शीत गृह निर्माण कराने ६५ लाख की स्वीकृति मिली थी। मामले में टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद छत्तीसगढ़ मत्स्य महासंघ रायपुर को निर्माण कराने सांैपा गया था। वहीं मछली पालन विभाग बैकुंठपुर को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मत्स्य महासंघ ने भवन निर्माण कर आधुनिक मशीनरी खरीदने के बाद बिना इंस्टाल कराए ही अधूरा छोड़ दिया है। शीतगृह की मशीनरी लावारिस हालत में निर्माणाधीन भवन में पड़ी है। मशीनरी को इंस्टाल नहीं करने के कारण धीरे-धीरे कबाड़ होने लगी हैं। वहीं मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण शीतगृह पिछले सात साल से अधूरा पड़ा हुआ है। जिससे स्थानीय मछली पालक तालाब, जलाशय से मछली निकालने के बाद औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। क्योंकि तालाब से सुबह मछली निकालने के बाद सुरक्षित व ताजा रखने शीतगृह की सुविधाएं नहीं मिलती है।

सिर्फ स्पॉन उत्पादन में फोकस, मछली को सुरक्षित व ताजा रखने में अनदेखी
जानकारी के अनुसार झुमका मत्स्य प्रक्षेत्र में हर साल 6.5० करोड़ मत्स्य स्पॉन(बीज)का उत्पादन होता है। परिसर में 10 यूनिट में मछली पालन करते हैं। प्रत्येक यूनिट में 25 लाख स्पान डालते हैं। कलक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले में मत्स्य उद्योग की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य उत्पादन करने और आने वाले सीजन में 8.5० करोड़ उत्पादन करने दिया है। जिले में मत्स्य उत्पादन एवं व्यवसाय में अच्छी संभावनाएं हैं। वहीं स्वसहायता समूह व किसानों को आयमूलक आजीविका का अतिरिक्त साधन मुहैय्या कराने की तैयारी है। दूसरी ओर अप्रैल २०१५ से बन रहे मत्स्य बर्फ संयंत्र सह शीत गृह को पूरा कराने पर कोई ध्यान नहीं है। जिससे शीतगृह पिछले सात साल से अधूरा पड़ा है।

कोरिया मछली खपत के मुकाबले उत्पादन में पीछे, दूसरे जिलों पर आश्रित
मत्स्य पालकों के अनुसार कोरिया में हर महीने २०० टन मछली की खपत है। लेकिन खपत के मुकाबले महज १०० टन उत्पादन होता है। इसलिए पड़ोसी जिले के मछली पालक कोरिया में आपूर्ति करते हैं। जो ताजा मछली नहीं होती है। दूसरे जिले के लोग मछली निकालने के बाद बर्फ में रखकर बिक्री करने आते हैं।

६५ लाख की लागत से निर्मित होने वाले मत्स्य बर्फ संयंत्र सह शीत गृह के संबंध में सोनवानी साहब बेहतर बता पाएंगे।
वायएन द्विवेदी, सहायक संचालक मत्स्य कोरिया

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