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छत्तीसढिय़ा बोरे बासी: वैज्ञानिक और अंग्रेजी नाम है '' HOL NIGHT WATER SOCKING RICE"

बोर बासी खाने से न सिर्फ गर्मी और लू से राहत मिलती है, बल्कि हाइपरटेंशन सहित बीपी भी नियंत्रित रहता है।

कोरीया

Published: May 01, 2022 07:32:40 pm


बैकुंठपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रमिक दिवस पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक भोजन बोरे बासी खाने का आह्वान किया। इस दौरान जनप्रतिनिधि सहित अधिकारी-कर्मचारियों ने बोरे बासी खाकर छत्तीसगढ़ी आहार व संस्कृति को सम्मान दिया। आम वृक्ष की छाया में श्रमवीरों के सम्मान में छत्तीसगढ़ी आहार व संस्कृति के गौरव की अनुभूति के साथ कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने बिटिया, एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के साथ बोरे बासी का आनंद लिया। बोरे बासी के साथ नून चटनी, अचार, मिर्च, गोंदली(प्याज) सहित विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखा। बोरे बासी छत्तीसगढ़ की प्राचीन भोजन शैली तथा पारंपरिक विरासत है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के लोग आधुनिकता के चलते अपने खान-पान भूल रहे हैं। वहीं विदेशों में लोग बोरे बासी खा रहे हैं। अमेरिका में छत्तीसगढ़ के बोरे और बासी पर शोध हो चुका है। अमरीका ने बासी पर शोध कर इससे होने वाले फायदे और वैज्ञानिक कारण ढूंढ निकाला है। बासी का वैज्ञानिक और अंग्रेजी नाम है ***** नाइट वाटर सोकिंग राइस। शोध के मुताबिक बोर बासी खाने से न सिर्फ गर्मी और लू से राहत मिलती है। बल्कि हाइपरटेंशन सहित बीपी भी नियंत्रित रहता है।

ऐसे बनाए जाते है बोरे और बासी
बुजुर्गों के कुछ लोग बोरे और बासी को एक ही समझते हैं। लेकिन बोरे और बासी में क्या अंतर होता है। खाने के बाद बचे चावल को रातभर पानी में डुबाकर रखते हैं, उसे बासी कहते है और सुबह खाते हैं। वहीं रात को बने चावल को ठंडा होने के बाद पानी डालकर रात में खाते हैं उसे बोरे कहते हैं। बासी न सिर्फ छत्तीसगढ़ में खाया जाता है, बल्कि ओडिशा में भी लोकप्रिय है। इसके अलावा चावल पैदावार वाले दक्षिण भारत के कई राज्यों में खाया जाता है। वहां नाम और खाने के तरीके अलग है। आंध्रप्रदेश और केरल के लोग सांभर, रस्सम और इमली पानी(चारु पानी) के साथ खाते हैं।

ऐसेे बढ़ जाता है जायका, नींद भी अच्छी आती है
बोरे और बासी को ऐसे ही नहीं खाया जाता है। बासी के लिए नमक सबसे जरुरी चीज है। छत्तीसगढ़ के लोग इसे सुबह छाछ, दही और भरपूर मात्रा में नमक डालकर हरी मिर्ची और प्याज के साथ खाते हैं। वहीं उच्च वर्ग और संपन्न लोग आचार, पापड़ और बिजौरी के साथ खाते हैं। अब नई पीढ़ी के लोग नमकीन के साथ भी खाने लगे हैं। बासी खाने के बाद प्यास लगती है इससे व्यक्ति पानी ज्यादा पीता है। पानी ज्यादा पीने से डि-हाइड्रेशन की समस्या अपने आप खत्म हो जाती है। इसी तरह बासी या बोरे खाने के बाद शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। नींद भी जल्दी और अच्छी आती है। भरी गर्मी में दिनभर काम करने वाले मजदूरों का तामपान बासी खाने के कारण ही नियंत्रित रहता है।

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