प्रेस कांफ्रेंस में ये बात कहते-कहते रोने लगे मंत्री, फिर तौलिए से पोंछी आंसुओं से भरी आंखें- देखें Video

प्रेस कांफ्रेंस में ये बात कहते-कहते रोने लगे मंत्री, फिर तौलिए से पोंछी आंसुओं से भरी आंखें- देखें Video

Ram Prawesh Wishwakarma | Publish: Sep, 03 2018 08:13:39 PM (IST) Koria, Chhattisgarh, India

फफक-फफक कर बोले- यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है, नई दिल्ली में लीवर ट्रांसप्लांट कराने के बाद लौटा था 4 साल का अश्विन

बैकुंठपुर. अपने निवास स्थल पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में श्रम मंत्री भइयालाल राजवाड़े अचानक रोने लगे। उनकी आंखों से आंसुओं की धार बह निकली। नई दिल्ली से लीवर ट्रांसप्लांट कराने की बाद 4 साल का अश्विन परिजन के साथ मंत्री के घर पहुंचा था।

इस दौरान मंत्री बोले कि आज मुझे जनता ने सेवा करने का मौका दिया है। इसलिए नि:स्वार्थ भाव से उनकी सेवा में लगा हूं। मेरे पास कोई भी किसी तरह की मदद के लिए आया है तो निराश नहीं होने दिया हूं और उसकी हर संभव मदद करता आया हूं।

 

उक्त बातें श्रम खेल एवं युवा कल्याण मंत्री भईयालाल राजवाड़े ने अपने निवास सरडी में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम रामपुर गेल्हापारा निवासी 4 साल के बालक अश्विन साहू पिता राजपाल साहू का इंस्टीट्यूट आफ लीवर एंड विलेरी सांइस नई दिल्ली में लीवर ट्रांसप्लांट कराया गया है।

बालक हाल ही में इलाज के बाद अपने घर लौटा है। उसके इलाज में 15 लाख खर्च बताया गया था जिसे गरीब परिवार वहन करने में असमर्थ था। उनकी हालत को देखकर मुख्यमंत्री सहित केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा कर विशेष पहल की गई थी और सफलता भी मिली।

इलाज सहित दिल्ली में रहने खाने व अन्य व्यवस्था में कुल 25 लाख का खर्च आया है और अगले दो साल तक संपूर्ण देखरेख, दवा इत्यादि में भी खर्च आएगा। जिसे स्वयं वहन करूंगा। अस्पताल प्रबंधन को मैंने शपथ पत्र दिया है जिससे उसका इलाज संभव हो सका और उसकी जान बच सकी है।

 

Bhaiyalal Rajwade weeping

उन्होंने कहा कि यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इस दौरान भावुक होकर फफक-फफक कर रो पड़े और कहा कि ये दुख के नहीं, बल्कि खुशी के आंसू हैं।


रायपुर बंगले में रहने-खाने व अस्पताल तक जाने वाहन सुविधा
श्रममंत्री राजवाड़े ने कहा कि पहली बार विधायक और संसदीय सचिव बनने के बाद मैंने लोगों के इलाज का बीड़ा उठाया। रायपुर का सरकारी आवास को सभी के लिए खुला है। जहां मेरे विधानसभा ही से नहीं, अपितु कोरिया, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर सहित प्रदेश के कई जिले के मरीज आकर रह रहे हैं। रायपुर के कई अस्पतालों में इलाज की सुविधा मुहैया कराई गई है और सरकारी आवास में उनके रहने खाने सहित अस्पताल लाने पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।


10 साल में 7475 मरीजों का कराया इलाज
मंत्री ने कहा कि अभी तक मेकाहारा रायपुर में 4634 मरीज, रामकृष्ण केयर रायपुर में 154 मरीज, बालाजी हास्पिटल रायपुर में 306 मरीज व अन्य अस्पताल में 113 मरीज का उपचार कराया गया है। इसके अलावा संजीवनी कोष से 372 प्रकरण की स्वीकृति, संजीवनी कोष से 103 प्रकरण शिथिल कराए गए हैं।

कैंसर के 1697 मरीज, ब्रेन हेमरेज के 19 मरीज, किडनी के 85 मरीज, लीवर संबंधी 8 मरीज, हार्ट संबंधी 25 मरीज व सामान्य बीमारी के 99 मरीजों का इलाज कराया जा चुका है। पिछले करीब 10 साल में 7475 मरीज को इलाज कराने में सहयोग किया गया है।

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