काले हीरे की नगरी पहले थी छेड़ीमेड़ी, अंग्रेजों ने बदला नाम, ब्रिटिश शासन काल में 90 साल पहले यहां खुलीं खदानें

Black diamond city: वर्ष 1933 में कोयला उत्पादन (Coal production) 26 लाख 40 हजार 20 टन तथा 1980 में 31 लाख 62 हजार 500 टन हो गया था

By: rampravesh vishwakarma

Published: 13 Oct 2020, 01:56 PM IST

बैकुंठपुर. चिरमिरी (Chirimiri) को काले हीने की नगरी (Black diamond city) के नाम से जाना जाता है। यहां करीब 90 साल पहले ब्रिटिश (British) शासनकाल में प्राइवेट भूमिगत कोयला खदानें खुलीं और धीरे-धीरे देश के हर कोने से लोग आने लगे। शहर की आबादी बढऩे के बाद चिरमिरी को नगर निगम का दर्जा मिला। आज यहां की आबादी करीब सवा लाख है।


चिरमिरी का पुरातन नाम छेड़ीमेड़ी था। छेड़ी मतलब सीढ़ी, मेड़ी मतलब मेड़ है। ब्रिटिश शासनकाल में छेड़ीमेड़ी का अंग्रेजी नाम चिरिमिरी रखा गया। उसके बाद आबादी बसाने व जल संग्रहण करने के उद्देश्य से वर्ष 1921 में छोटी बाजार व बड़ी बाजार के बीच करीब 300 मीटर पहाड़ों के बीच गहराई में स्टापडेम का निर्माण कराया गया।

वर्ष 1923 में बस्ती बसने लगी। वहीं स्टापडेम में पावर हाउस का निर्माण कर बिजली उत्पन्न कर बस्तियों में रौशनी और फिल्टर प्लांट से जलापूर्ति होती थी। वर्ष 1928 में एनसीडीसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने डोमनहिल, कोरिया कालरी में भूमिगत खदान नींव रखी थी। जिसे डागा कंपनी के नाम से जानते थे।

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वहीं शहर में कोयले (Coal) का भण्डार होने की जानकारी होने पर टाटा कंपनी के सर्वेयर टीम को बुला कर जांच कराई थी, इसके बाद शहर में बड़ी मात्रा में काले हीरे का संग्रहण होने की जानकारी मिली थी।

पहले निजी कोयला खदानें चलती थी। दादू लहरी को चिरमिरी का संस्थापक कहा जाता है। टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ने कोयले की जांच शुरू की थी, लेकिन कोयला खनन नहीं किया था।

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ये है प्राइवेट कोल माइंस से राष्ट्रीयकरण होने का सफर
वर्ष 1930 में चिरमिरी कॉलरी खुली, जिसमें 1932 में उत्पादन शुरू हुआ था। उसके बाद 1942 में न्यू चिरमिरी कॉलरी, 1945 में प्योर चिरमिरी कॉलरी और 1946 में नॉर्थ चिरमिरी कॉलरी खुली। साथ ही न्यू चिरमिरी पोंड़ी हिल्स, पश्चिम चिरमिरी, डोमन हिल और कोरिया कॉलरी का संचालन शुरू हुआ।

प्राइवेट कोयला खदान में 1933 में कोयला उत्पादन (Coal production) 264000 टन था। लेकिन 1980 में उत्पादन बढक़र 3162500 टन हो गया।चिरमिरी कोलफील्ड की कॉलरी कई प्राइवेट कंपनी, मालिकों के स्वामित्व में थी।

जिसमें चिरमिरी कॉलरी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, डब्बाभाई की न्यू चिरमिरी पोनरी हिल कंपनी(प्राइवेट) लिमिटेड, यूनाइटेड कॉलरीज लिमिटेड, केएन धड़ी और इंद्र सिंह एंड संस(प्राइवेट) लिमिटेड शामिल थी।

वर्ष 1973 में राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। कोल इंडिया के तहत एसइसीएल में काम करने इंडिया के हर कोने से इंजीनियर्स, टेक्निकल स्टाफ व वर्कर्स आए।

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सवा लाख आबादी, फिर 2003 में नगर निगम का दर्जा मिला
राज्य सरकार ने चिरमिरी क्षेत्र के विकास के लिए पहले विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन किया था। जिसमें क्षेत्र के साथ आसपास के 16 गांव सम्मिलित थे। वहीं 22 जून 1995 में संविधान के 74वां संशोधन होने के कारण विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भंग कर नगरपालिका परिषद् चिरमिरी का गठन किया गया था।

वहीं अगले चरण में 27 जनवरी 2003 को अधिसूचना जारी कर चिरमिरी को नगर पालिका निगम का दर्जा दिया गया है। नगर निगम का दर्जा देते समय वर्ष 2001 की जनगगणना के अनुसार 102034 आबादी थी। चिरमिरी को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद 40 वार्डों में विभाजित किया गया है।


चिरमिरी की प्रमुख कॉलरी
-चिरमिरी खदान 1928
-कुरासिया खान 1932
-रेल्वे एनसीपीएच खान 1941
-नार्थ चिरमिरी खान 1946
-वेस्ट चिरमिरी खान 1950
-कोरिया डोमनहील खान 1962


प्राकृतिक तौर पर समृद्ध होने से मिली पहचान
चिरमिरी (Chirimiri) का पुराना नाम छेड़ीमेड़ी (Chhedimedi) था। कोल उत्पादन होने और प्राकृतिक तौर पर समृद्ध होने से नगर को पहचान मिली है।
डॉ भागवत दुबे, रिटायर्ड प्रोफेसर लाहिड़ी कॉलेज चिरमिरी

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