कहानी काले हीरे की नगरी के उजडऩे की: 20 साल में 22 हजार रिटायर्ड कॉलरी कर्मचारी छोड़ गए नगरी

Black diamond city: एसइसीएल लीज की 294 हेक्टेयर अनुपयोगी जमीन राज्य सरकार (State Government) को सौंपकर आबादी बसाने की तैयारी ठण्डे बस्ते में।

By: rampravesh vishwakarma

Published: 20 Oct 2020, 04:24 PM IST

बैकुंठपुर/चिरमिरी पोड़ी. काले हीरे की नगरी (Black diamond city) के नाम से प्रसिद्ध चिरमिरी की जनसंख्या दिन-ब-दिन घटने लगी है। एसईसीएल की कोयला खदानें बंद होने व सेवानिवृत्ति के बाद कॉलरी कर्मचारी शहर छोडक़र अन्यत्र जाने लगे हैं।

पिछले 2 दशक में शहर की 20 फीसदी जनसंख्या घट चुकी है। वहीं एसईसीएल लीज की 294 हेक्टेयर अनुपयोगी जमीन राज्य सरकार को सौंपकर आबादी बसाने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।


वर्ष 1972 में प्राइवेट कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण होने के बाद वर्ष 1980 तक बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती हुई थी। इससे सिर्फ कॉलरी कर्मचारियों की संख्या 28 हजार और वर्ष 2000 में 26 हजार थी।

इस दौरान वर्ष 2004 में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की संख्या बढऩे लगी और हर महीने औसतन 10-12 कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद शहर छोडक़र जाने लगे हैं। 20 साल बाद वर्ष 2020 में कर्मचारियों की संख्या घटकर महज 4000 है। पिछले दो दशक में 11 कोयला खदानें (Coal mines) बंद होने के कारण कुछ कर्मचारी स्थानांतरित कर दिए गए हैं।

नगर निगम क्षेत्र की अधिकांश जमीन एसइसीएल लीज व फॉरेस्ट, नगर निगम (Nagar Nigam) अधिकृत होने के कारण सेवानिवृत्ति के बाद कोई बसने को तैयार नहीं है। क्योंकि रिटायर्ड कर्मचारी को घर बनाने के लिए जमीन की जरूरत पड़ेगी और जमीन चिरमिरी एरिया में नहीं मिलेगी।

दूसरी ओर कोयला खदान बंद होने से चिरमिरी के व्यवसाय पर काफी प्रभाव पड़ा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए लोग बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं।

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8 हजार क्वार्टर खाली, सिर्फ 4 हजार कर्मचारी कार्यरत
एसइसीएल चिरमिरी क्षेत्र में दो दशक पहले 26 हजार कर्मचारी कार्यरत थे। उस समय चिरमिरी में करीब 12 हजार स्टाफ क्वार्टर बनाए गए थे। फिलहाल 8 हजार क्वार्टर खाली और सिर्फ 4 हजार क्वार्टर में कर्मचारी निवासरत हैं।

हालाकि वर्ष 2016 से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्टाफ क्वार्टर लीज पर आवंटन कर शहर में बसाने लड़ाई चल रही है। फिलहाल एसइसीएल से कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।

इतने कर्मी छोड़ गए
2016 528
2017 685
2018 499
2019 570
2020 598
2021 560

पहले इतने कॉलरी एरिया थे
-अंजनहिल कॉलरी बरतुंगा।
-ओसीपी चिरमिरी कॉलरी।
-कुरासिया कॉलरी।
-पोड़ी वेस्ट चिरमिरी कॉलरी।
-गेल्हापानी कॉलरी।
-कोरिया कॉलरी।
-एनसीपीएच कॉलरी।

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वर्तमान में इतने कॉलरी एक्टिव
-एनसीपीएच कॉलरी।
-कुरासिया कॉलरी।
-ओपन कास्ट प्रोजेक्ट।
-बरतुंगा कॉलरी।
-रानी अटारी(कोरबा जिला)।

दो दशक में इतनी खदानें बंद हुईं
-गेल्हापानी नार्थ चिरमिरी कालरी 1 खदान
-कोरिया कॉलरी 2 खदान
-डोमनहिल कॉलरी 2 खदान
-वेस्ट चिरमिरी कॉलरी 3 खदान
-कुरासिया ओपन कास्ट 1 ओसीपी
-अंजनहिल खदान चिरमिरी 1 खदान
-एनसीपीएच हल्दीबाड़ी 3 खदान


294 हेक्टेयर अनुपयोगी जमीन शासन को देने की गई है पहल
सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक में एसईसीएल चिरमिरी (SECL Chirimiri) की अनुपयोगी जमीनों को वापस राज्य शासन को देने को लेकर एक पहल की गई है। इसमें 294 हेक्टेयर अनुपयोगी भूमि चिह्नित की गई थी।
के. डोमरु रेड्डी, पूर्व महापौर चिरमिरी


प्रतिमाह हो रही सेवानिवृत्ति
चिरमिरी क्षेत्र से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति प्रत्येक माह हो रही है। नौकरी में यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो चलती रहती है।
घनश्याम सिंह, महाप्रबंधक एसइसीएल चिरमिरी

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