शर्मनाक: कोरोना से बचने सभी अपने घरों में थे कैद, इधर निर्दयी मां ने जन्म लेते ही बेटी को मरने फेंक दिया बाहर, लेकिन...

Embarrassing: बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का गांवों में नहीं दिख रहा असर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने नवजात को जिला अस्पताल में कराया भर्ती

By: rampravesh vishwakarma

Published: 27 Mar 2020, 08:06 PM IST

बैकुंठपुर. जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग ने शहर से लेकर गांव-गांव में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चला रखा है। वहीं दूसरी ओर ग्राम मुरमा में जन्म के तुरंत बाद एक मासूम बेटी को उसकी मां ने लावारिस छोड़ दिया। 22 मार्च को पीएम मोदी ने जनता कफ्र्यू (Public curfew) का आह्वान किया था। (Coronavirus)

उसी सुबह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने घर के बाहर नवजात को देखा तो उसे अन्य लोगों की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया। नवजात की सेहत में जब चौथे दिन सुधार आया तो उसे मातृछाया अंबिकापुर को सौंपा गया।


बैकुंठपुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता फूलमति को 22 मार्च सुबह 6.50 बजे अपने घर के सामने एक लावारिस हालत में एक नवजात बच्ची मिली। इसकी जानकारी उसने ग्राम पंचायत मुरमा सरपंच उदय सिंह को दी। मामले में पंच अमरेश कुमार, कार्यकर्ता फूलमति, एमपीडब्ल्यू रीना व ललिता बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।

मासूम बच्ची का वजन 2.5 किलोग्राम है और जन्म के तुरंत बाद लावारिस छोडऩे की आशंका जताई गई। जिला अस्पताल के एसएनसीयू बैकुंठपुर में भर्ती कर बच्ची का उपचार प्रारंभ कर दिया गया।

इस दौरान बच्ची की सेहत ठीक होने के बाद चौथे दिन सेवा भारती मातृसेवा अंबिकापुर को सौंप दिया गया। कोतवाली पुलिस के प्रतिवेदन के आधार पर पटना थाना में आरोपी अज्ञात महिला के खिलाफ धारा 317 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।


आज भी जारी है भेदभाव
गौरतलब है कि केंद्र व राज्य सरकार बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने को लेकर लगातार अभियान चलाकर आम जनता को जागरूक कर रही है और नोनी सुरक्षा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना सहित अन्य योजनाएं चला रही है। बावजूद ग्रामीण अंचल में आज भी बेटी व बेटा में भेदभाव जारी है।

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