पेयजल को जांचने के 18 तरीके लेकिन जागरुकता की कमी, संक्रमित बीमारी की चपेट में आ रहे लोग

गौरतलब है कि जिले में 3 हजार से अधिक निजी बोर है, जिसका इस्तेमाल पीने के पानी के रुप में किया जाता है। ऐसे में हर समय संक्रमित बीमारियों का अंदेशा बना रहता है।

By: कंचन ज्वाला

Published: 05 Dec 2015, 11:26 PM IST

कोरिया/चिरमिरी. पानी की जांच को लेकर जिले के लोग जागरुक नहीं है और दूषित पानी को पीने में उपयोग कर रहे हैं।  इसके कारण लोग संक्रमित बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जबकि पानी की जांच के लिए जिले में 2 लैब बने हुए हैं। हालांकि जिला मुख्यालय स्थित लैब से मिली जानकारी के अनुसार वार्षिक टारगेट तो पूरा हो रहा है, किंतु यहां वही जांच होती है, जो सरकारी तौर पर आ रही है। गौरतलब है कि जिले में 3 हजार से अधिक निजी बोर है, जिसका इस्तेमाल पीने के पानी के रुप में किया जाता है। ऐसे में हर समय संक्रमित बीमारियों का अंदेशा बना रहता है।

ब्यूरो ऑफ  इंडियन स्टैडर्ड (बीआईएस) के लिहाज से पानी की शुद्धता जांचने के करीब 18 मापदंड हंै, किन्तु लोगों में जागरुकता नहीं होने और जानकारी के अभाव में वे पानी की जांच ही नहीं करवा रहे हैं। कोरिया जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है और यहां करीब 20 प्रतिशत पानी फ्लोराइड युक्त है। ऐसे में हड्डियां गलना शारीरिक विकृति जैसी  बीमारियां पैर पसार रही हंै। इधर पानी में अत्यधिक टीडीएस होने से बदहजमी, पेट में गैस होना यहां तक किडनी पर विपरित असर पडऩे जैसे विकृतियां भी देखी जाती हंै। ऐसे में घरेलू बोरिंग या सार्वजनिक स्त्रोत के पानी की समय -समय पर जांच करवाना जरुरी है।

जिले में पेयजल की बड़ी समस्या फ्लोराइड युक्त पानी की है। बताया जाता है कि पानी में फ्लोराइड प्राकृतिक समस्या है, जिसका किसी भी तरह से ट्रिटमेंट संभव नहीं है। अब तक जिलेभर में फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या बैकुन्ठपुर विकासखंड और खडग़वां के आसपास के इलाकों में पाई गई है। वहीं सोनहत और भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में भी फौरी तौर पर फ्लोराइड युक्त पानी पाया जाता है।
 
ये होनी चाहिए जांच
मटमैला पानी, पीएच, टीडीएस, क्षारियता (खारापन), क्लोराइड, कुल कठोरता, कैल्शियम, मैग्निशियम, नाइट्रेट, लोहा फ्लोराइड, सल्फेट, ऑर्सनिक, अवशेष क्लोरिन, कुल कॉलिफार्म, मल कॉलिफार्म। ऐसी कुल 18 प्रकार की जांच होती है।
दूषित पानी से कई तरह की बीमारयां फैल रही हंै। जिला अस्पताल में आने वाले लगभग 50 फीसदी मरीजों में हाथ पैर दर्द करना, हड्डियां कमजोर होना, पथरी, हैजा, टाइफाइड, उल्टी-दस्त जैसी बीमारियां देखी जा रही हंै। इस तरीके की बीमारी में दूषित एवं भारी पानी पीने से होती है।
डॉ. एसएन चावड़ा, सीएमएचओ

जिन बोरिंग में फ्लोराइड युक्त पानी मिलता है, उन्हें लाल निशान के साथ बंद कर देते हंै। शेष जल स्त्रोत के सैंपल समय-समय पर जांच के लिए भेजे जाते हैं।
विजय मिंज, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

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