खदान का गंदा पानी 'झुमका जलाशय' को कर रहा प्रदूषित

एसईसीएल चरचा प्रबंधन ने बनाया है ट्रीटमेंट प्लांट, लेकिन प्लांट केनीचे से छोड़ा जा रहा खदान का गंदा पानी

By: Pranayraj rana

Published: 18 May 2016, 03:14 PM IST

बैकुंठपुर. चरचा कॉलरी प्रबंधन ने खदान से निकलने वाले केमिकलयुक्त गंदा पानी को ट्रीटमेंट करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है। लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट में खदान के पूरे पानी का ट्रीटमेंट नहीं किया जा रहा है। प्रशासन को दिखाने के लिए नाला में जगह-जगह चूने का बांध बनाया गया है।

बांध में भी चूने की पर्याप्त बोरी नहीं रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार एसईसीएल प्रबंधन द्वारा हर दिन करीब 80 हजार लीटर खदान का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। खदान का गंदा पानी नाला के माध्यम से झुमका जलाशय में मिल रहा है और जलाशय का पानी दूषित हो चुका है।

एसईसीएल चरचा प्रबंधन द्वारा खदान से निकलने वाले केमिकलयुक्त पानी को झुमका जलाशय में छोड़ा जा रहा है। जिला प्रशासन ने पर्यावरण अधिकारी, खनिज अधिकारी के नेतृत्व में फिल्टर प्लांट व नाला का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। टीम ने मार्च में चरचा पहुंचकर एसईसीएल के फिल्टर प्लांट व नाला का निरीक्षण किया था।

इस दौरान ट्रीटमेंट और नाला में जगह-जगह चूने की बोरी से बंधान से पानी को फिल्टर करने की जानकारी दी गई थी। मामले में अधिकारियों ने खदान से निकलने वाले गंदे पानी का ट्रीटमेंट के बाद ही नाला में छोडऩे की हिदायत दी थी। वर्तमान में एसईसीएल के बनाए गए चूने की बोरी बंधान से गायब हो गए हैं। नाला के माध्यम से खदान का पूरा गंदा पानी बहकर झुमला जलाशय में मिल रहा है।

जबकि एसईसीएल प्रबंधन सालों से हर दिन करीब 80 हजार लीटर से अधिक खदान का गंदा व केमिकलयुक्त पानी  छोड़ा जा रहा है।  जिससे झुमका जलाशय का पानी दूषित हो चुका है। जल संसाधन विभाग के अनुसार पिछले साल झुमका जलाशय के पानी की जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में जलाशय का पानी पीने लायक नहीं निकला था।

जरूरत के लिए पानी का फिल्टर
एसईसीएल ट्रीटमेंट प्लांट के कर्मचारियों के अनुसार खदान से निकलने वाले पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए फिल्टर प्लांट लगाया गया है। पानी का ट्रीटमेंट कर वापस खदान में भेजा जा रहा है। पानी को फिल्टर कर स्टेशन के पास कोयले की सिंचाई और खदान में कोयला उत्खनन में लगी मशीन में उपयोग किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार खदान से निकलने वाले करीब 90 फीसदी पानी को बिना ट्रीटमेंट कर नाला में छोड़ा जा रहा है। वर्तमान में चरचा के दो खदान से हर दिन करीब 80 हजार लीटर केमिकलयुक्त पानी निकल रहा है। जिसे नाला के माध्यम से जलाशय में छोड़ जा रहा है।

वाटर रिचार्ज पर पड़ेगा असर
भू-गर्भशास्त्री नूर मोहम्मद के अनुसार शुद्ध पानी का पीएच मान 7 होता है।लेकिन खदान का केमिकलयुक्त पानी मिलने से कंटामिनेशन बढ़ जाता है। इससे पानी की अवस्था एसिडिक हो जाती है। क्योंकि कोयला में लेड, आर्सेनिक सहित अन्य तत्व होते हैं। खदान के केमिकलयुक्त पानी का उपयोग करने से चर्म सहित अन्य बीमारी होने की आशंका रहती है। इसके अलावा खदान का गंदा पानी जलाशय में मिलने से ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर भी काफी असर पड़ता है।
Pranayraj rana
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