अकाउंटेंट व फर्म संचालक पर साढ़े 3 साल बाद भी एफआईआर नहीं, सीईओ ने दी थी जांच रिपोर्ट

Scam: तात्कालीन सीईओ (CEO) ने दोनों के खिलाफ अपराध दर्ज करने थाना प्रभारी को लिखा था पत्र, रिकवरी (Recovery) की भी की गई थी सिफारिश

By: rampravesh vishwakarma

Published: 14 Sep 2021, 03:15 PM IST

खडग़वां. शौचालय निर्माण में गड़बड़ी का खुलासा होने और आदेश के बाद साढ़े 3 साल में तात्कालीन लेखापाल गोपाल प्रसाद साहू व फर्म संचालक अजय कुमार साहू के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं हुआ है,

जबकि इस मामले में तत्कालीन सीईओ ने जांच रिपोर्ट सौंपकर थाना प्रभारी को अपराध दर्ज करने पत्र लिखा था। वहीं जांच प्रतिवेदन में दोनों से रिकवरी की सिफारिश भी की गई थी।


कोरिया जिले के जनपद पंचायत खडग़वां से मनरेगा योजना के तहत शौचालय निर्माण कराए गए थे। ग्राम पंचायत भरदा के तत्कालीन सरपंच बीराबाई ने कलक्टर से कुछ शौचालयों के भुगतान में फर्जी बिल लगाने की शिकायत दर्ज कराई थी। वहीं सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में जांच प्रतिवेदन में तथ्य सामने आए।

जिला पंचायत से मई 2016 को प्रशासकीय स्वीकृति के बाद जनपद पंचायत से मई 2016 को 217 नग शौचालय निर्माण कराने जिम्मेदारी सौंपी थी। मामले में ग्राम पंचायत भरदा को निर्माण एजेंसी बनाकर प्रथम चरण में 170 नग शौचालयों के पूर्णत व उपयोगिता प्रमाण पत्र सहित बिल जनपद पंचायत कार्यालय में जमा किए गए थे।

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ग्राम पंचायत के अनुसार सभी बिल दो फर्म राजेश कुमार जायसवाल और मेसर्स विनोद कुमार सिंह की ओर से सामग्री प्रदाय के लिए प्रस्तुत किए गए थे। बिल की जांच में पाया गया कि सभी अलग अलग नंबर एवं मालिक के हस्ताक्षर हैं। प्रथम चरण में बने 160 नग शौचालयों के बिल में सरपंच व सचिव के हस्ताक्षर हैं।

जबकि 10 शौचालयों में आयुश फ्लाई एश ब्रिक्स नामक फर्म के बिल लगाए गए थे। जिसमें एक भी बिल मूल प्रति में नहीं थे और सभी बिल में एक ही नंबर 99 दर्ज थे। बावजूद सभी बिल के भुगतान भी फर्म को कर दिया गया था। फर्म के मालिक ने स्वीकार भी किया कि एक ही बिल प्रस्तुत किया है,

जिसकी फोटोकापी कराकर अन्य 9 बिल लगाए गए थे। जांच रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद जिला पंचायत ने जनपद खडग़वां को 23 मार्च 2018 को आदेश जारी कर थाना में अपराध पंजीबद्ध कराने के बाद रिपोर्ट मांगी थी।

मामले में तत्कालीन जनपद सीइओ ने 7 अप्रैल 2018 को खडग़वां थाना प्रभारी को पत्र लिखकर अपराध पंजीबद्ध करने पत्र लिखा था। बावजूद साढ़े 3 साल में सरकारी राशि की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं हुआ है।

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जांच प्रतिवेदन में रिकवरी की सिफारिश
शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की जांच प्रतिवेदन में रिकवरी की सिफारिश की गई थी। प्रतिवेदन में लिखा है कि यह एक सोची समझी तरकीब के तहत शासकीय राशि के आहरण का मामला है। इसलिए इसमें मुख्य रूप से दोषी लिपिक एवं फर्म संचालक अजय कुमार साहू से 90 हजार वसूली करना उचित होगा।

यह उच्च अधिकारियों को धोखे में रखकर किया गया एक जालसाजी का प्रकरण भी है। इसलिए दोषी लिपिक और फर्म संचालक के विरुद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराया जाना उचित होगा।

मामले में थाना प्रभारी खडग़वां को दस्तावेज संलग्न क्रमांक 1 से 58 पृष्ठ तक अभिलेख प्रदाय कर अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने चि_ी लिखी गई थी। बावजूद आज तक खडग़वां थाने में अपराध पंजीबद्ध नहीं हुआ है।

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