scriptTiger movement: Tiger hunting buffallow in forest, fears in villagers | जंगल में हुआ भैंस का शिकार, पंजे के निशान देख सबके उड़े होश, जांच कराने राजधानी भेजा गया सैंपल | Patrika News

जंगल में हुआ भैंस का शिकार, पंजे के निशान देख सबके उड़े होश, जांच कराने राजधानी भेजा गया सैंपल

Tiger Movement: पंजे का निशान देख ग्रामीणों में दहशत, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट (Forest department) की टीम ने ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने की दी समझाइश, गुरु घासीदास उद्यान (Guru Ghasidas national park) में टाइगर, तेंदुआ, भालू सहित 32 प्रकार के जंगली जानवर करते हैं विचरण

कोरीया

Published: November 18, 2021 04:27:02 pm

बैकुंठपुर. Tiger Movement: गुरुघासीदास राष्ट्रीय से लगे ग्राम भगवानपुर में टाइगर द्वारा एक भैंस का शिकार किया गया। स्थल पर पंजों के निशान देख उसके टाइगर होने की पुष्टि की गई,

फिर भी उसके पंजे का सैंपल लेकर रायपुर जांच कराने भेजा गया है। इधर बाघ के पंजों के निशान देख सबके होश उड़ गए। क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट होने से ग्रामीणों में दहशत का आलम है।
Tiger movement
Villagers and forest team in forest

कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ वनमण्डल के कुंवारपुर वनपरिक्षेत्र के ग्राम भगवानपुर में सोमवार की रात एक बाघ पहुंचा था। बाघ ने ग्रामीण अमरेश की भैंस का शिकार बनाया था। यह रेगुलर फॉरेस्ट परिक्षेत्र में कुदरा परिसर के कक्ष क्रमांक पी-1277 क्षेत्र है।
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान से लगे होने के कारण वन्य प्राणी गांव तक पहुंच जाते हैं। मामले की सूचना मिलने के बाद मंगलवार सुबह फॉरेस्ट टीम पहुंची और टाइगर के पंजे का निशान लेकर सैंपल लेकर रायपुर वन्य मुख्यालय भेजा गया है। गौरतलब है कि गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान का एरिया 1440.57 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है।
Guru Ghasidas national park
IMAGE CREDIT: Tiger killed buffallow
वर्ष 2005 के सर्वेक्षण के हिसाब से उद्यान क्षेत्र में टाइगर (चार), मोर, तेंदुआ, नीलगाय, भालू, चीतल, हिरण, बारह सिंघा, चिरकभाल, जंगली बिल्ली सहित 32 प्रकार के जंगली जानवर पाए जाते हैं।
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टाइगर रिजर्व बनने से मूवमेंट बढ़ेगा
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथारिटी (एनटीसीए) से गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने अप्रुअल मिला है। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और सरगुजा के तमोर पिंगला अभयारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाया जाएगा। पहली बार टाइगर रिजर्व (Tiger reserve forest) का पूरा क्षेत्रफल आया।
टाइगर रिजर्व के कोर जोन में 2 हजार 49 वर्ग किलोमीटर तथा बफर जोन में 780 वर्ग किलोमीटर जंगल है। वहीं 2 हजार 829 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल टाइगर रिजर्व का हिस्सा होगा। वर्ष 2019 में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
जिसमें प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल नहीं था। एनटीसीए से गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने अनुमति मिल चुकी है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आएगा। वहीं टाइगर को उद्यान क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में भोजन मिलेगा ओर रहवास पर बेहतर काम किया जाएगा।

हुआ है टाइगर का मूवमेंट
ग्राम भगवानपुर में टाइगर का मूवमेंट हुआ है। एक भैंस को शिकार (Killed buffalow) बनाया है। फॉरेस्ट टीम घटना स्थल पर पहुंचकर टाइगर के पंजे के निशान का सैंपल लिया गया है। साथ ही ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने की समझाइश दी गई है।
केएस कंवर, एसडीओ फॉरेस्ट जनकपुर

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