चंबल नदी दुखान्तिका: मृतकों की संख्या 13 हुई, नदी से दो बालिकाओं के शव निकाले, गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार

कोटा जिले की सीमा के अंतिम छोर पर स्थित खातौली क्षेत्र के गोठड़ा कलां गांव के पास हुए चम्बल नदी दुखान्तिका में मृतकों की संख्या 13 पहुंच गई है। रेस्क्यू टीम ने दो बालिकाओं के शव गुरुवार को नदी से निकाल लिए।

By: kamlesh

Updated: 17 Sep 2020, 07:03 PM IST

कोटा/खातौली। कोटा जिले की सीमा के अंतिम छोर पर स्थित खातौली क्षेत्र के गोठड़ा कलां गांव के पास हुए चम्बल नदी दुखान्तिका में मृतकों की संख्या 13 पहुंच गई है। रेस्क्यू टीम ने दो बालिकाओं के शव गुरुवार को नदी से निकाल लिए। बालिकाओं के शव घटनास्थल से करीब 12 किमी दूर मिले हैं। कोटा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. रविदत्त गौड़ ने दूसरे दिन भी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की जानकारी ली।

बुधवार को गोठड़ा कलां के पास लोग चम्बल नदी पार कर बूंदी जिले के कमलेश्वर महादेव मंदिर जाने के लिए एक नाव में सवार हुए थे। इस नाव में 18 मोटरसाइकिलें और 40 से 50 लोग सवार थे। ज्यादा वजन होने से नाव नदी में डूब गई। इस हादसे में 13 लोग डूब गए, जिसमें से 11 लोगों के शव बुधवार को ही निकाल लिए गए थे। दो बालिकाएं लापता थी, जिनकी तलाश रातभर जारी रखी गई।

गुरुवार सुबह ठीकरदा गांव के घाट के पास घटना स्थल से करीब बारह किलोमीटर दूर लापता बालिका ज्योति गुर्जर (13 वर्ष) पुत्री ओमप्रकाश निवासी बरनाहाली का शव ग्रामीणों को नजर आया। सूचना पर पुलिस व एसडीआरफ की टीम मौके पर पहुंची तथा शव को घटना स्थल पर लाया गया। इससे कुछ दूर ही अल्का उर्फ गोलमा (15) पुत्री सत्यनारायण निवासी पापड़ा जिला बूंदी का शव बरामद हुआ। दोनों शव का मौके पर ही पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया।

मौसी के घर से वापस नहीं लौटी
अल्का उर्फ गोलमा रक्षाबंधन पर अपनी मौसी के यहां खातौली के छत्रपुरा गांव आई थी। चंबल नदी का जल स्तर कम होने के बाद जब नाव का संचालन शुरू हुआ तो बुधवार सुबह मौसी लौटंती व मौसा राधेश्याम के साथ अपने गांव के लिए रवाना हुई, लेकिन चंबल नाव दुखांतिका में मौसी लौटंती व भतीजी अल्का की मौत हो गई, जबकि मौसा राधेश्याम तैर कर सुरक्षित बाहर निकल आया। गुरुवार सुबह जैसे ही बालिका का शव उसके गांव पहुंचा तो माता-पिता का कलेजा मुंह को आ गया। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।

जिद खींच ले गई मौत के मुंह में
बरनाहाली निवासी ज्योति का शव घर पहुंचते ही उसके उसके पिता ओमप्रकाश व मां मूर्तिबाई का रो रोकर बुरा हाल हो गया। रातभर किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे इंतजार कर रहे मां-बाप की शव को देख बुरी हालत हो गई। मां बार-बार विलाप कर यही कहती रही कि काश ताईजी के साथ जाने की जिद नहीं करती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। बुधवार को ज्योति की ताईजी प्रेमबाई, लोकेश के साथ कमलेश्वर धाम के लिए रवाना हुई थी। नाव डूबने से प्रेमबाई की मौत हो गई थी, जबकि लोकेश तैर कर बाहर निकल आया था।

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