Update news : बंगाल से लेकर राजस्थान तक आतंक का पर्याय बन गया था मनीष का गिरोह, कई राज्यों में सोना लूट चुका था...

DHIRENDRA TANWAR

Publish: Mar, 17 2019 12:13:30 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 12:13:31 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा . एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया कुख्यात मनीष सिंह बंगाल से लेकर राजस्थान तक आतंक का पर्याय बन गया था। इन राज्यों में उसने सोना लूट की बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। मनीष का गिरोह कई राज्यों में सोने की बडी लूट कर चुका था। पश्चिम बंगाल में सोना की बड़ी लूट के बाद मनीष सिंह गिरोह के पास काफी पैसा आ गया था। उसी पैसे से उसने एके 47 और विदेशी पिस्टल खरीदी।

बिहार पुलिस के अनुसार मनीष सिंह कुख्यात सुबोध सिंह का कभी शागिर्द था। सुबोध की पहचान देश के कई राज्यों में सोना लूटने वाले कुख्यात के तौर पर होती है। पिछले साल एसटीएफ ने एक मुठभेड़ के बाद इसे पटना से गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी से पहले ही मनीष और सुबोध के गिरोह अलग हो गए थे। सुबोध को छोड़ मनीष ने अपना गैंग बना लिया और वह लूट की वारदातों को अंजाम देने लगा। पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में हुई लूट में इस गैंग के हाथ पौने 22 किलोग्राम सोना लगा था। महाराष्ट्र के नागपुर, राजस्थान के जयपुर और कोटा में 22 जनवरी 2018 को आठ करोड़ का 27 किलो सोना लूटा था। सुबोध की गिरफ्तारी के बाद से ही एसटीएफ मनीष के पीछे लगी थी। वैशाली में उसके होने की सूचना पर टोह लिया जा रहा था। कई दिनों से जवान रेकी भी कर रहे थे।

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इस दौरान यह तय हो गया कि मनीष और उसके गैंग के अपराधी लगभग रोज हसनपुर दियारा आते हैं। वहीं एक झोपड़ी बनवा रखी थी जहां अक्सर दिन में उनका ठिकाना होता था। रेकी के बाद उन्हें दबोचने के लिए एसटीएफ की कई टुकड़ी वहां गई थी। वैशाली एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बताया कि सोना लुटेरों की गैंग की धरपकड़ के लिए पटना एसटीएफ को शुक्रवार रात में ही ऑपरेशन की शुरुआत करनी पड़ी।

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बलुआ रेतीले इलाके और खादर का फायदा उठाकर अपराधी बच न निकलें इसलिए एसटीएफ के जवानों की एक टुकड़ी को नाव से भी यहां तक भेजा गया। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को खाली करा लिया। एनकाउंटर से बचे निकले अपराधियों की तलाश के लिए चप्पे-चप्पे की पुलिस ने तलाश की। पुलिस को खबर लगी कि सोना लूट को अंजाम देने वाले अपराधियों का एक गैंग कई माह से बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए दियारा में सक्रिय है।

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अपराधियों के ऐशो-आराम की सारी सुविधाएं दियारा क्षेत्र बहलोलपुर एवं पलवैया में उपलब्ध कराई जाती है। सूचना का पीछा करते हुए पुलिस ने जब मुखबिरी की तो अपराधियों के ठिकाने को देखकर भौचक रह गई। वहां जनरेटर और गाडिय़ों समेत तमाम सुविधाएं मौजूद थीं। जिसके बाद बिहार पुलिस और एसटीएफ ने ज्वाइंट ऑपरेशन चला एनकाउंटर को अंजाम दिया।

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