30 प्रतिशत युवा वेन्टिलेटर पर, कुल 160 युवा और हाई फ्लो ऑक्सीजन पर

कोरोना महामारी की दूसरी लहर युवाओं के लिए अधिक खतरनाक साबित हो रही है। संभाग के सबसे बड़े कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती रोगियों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता लगता है कि लगभग 160 युवा गंभीर कोविड बीमारी के कारण भर्ती है।

 

By: Abhishek Gupta

Published: 04 May 2021, 01:22 PM IST

कोटा. कोरोना महामारी की दूसरी लहर युवाओं के लिए अधिक खतरनाक साबित हो रही है। संभाग के सबसे बड़े कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती रोगियों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता लगता है कि लगभग 160 युवा गंभीर कोविड बीमारी के कारण भर्ती है। इनमें से 20 से 30 आयु वर्ग के 72 युवा है। 30 से 40 आयु वर्ग के 88 रोगी है। ये सभी ऑक्सीजन सपोर्ट है। इनमें से 30 प्रतिशत युवा वेन्टिलेटर पर है। मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में कोरोना संक्रमण अधिक होने के निम्न कारण सामने आए है। पहला युवाओं के टीका नहीं लगा, दूसरा मूवमेंट अधिक रहा तथा लापरवाही के कारण कोरोना प्रोटॉकाल का पालन नहीं करना रहा है।

अध्ययन में यह मिला

मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार, जिन युवाओं में बॉडी मास्क इंडेक्स 25 से अधिक था। ऐसे लोगों को भर्ती की आवश्यकता पड़ी और उन्हें आईसीयू वेन्टिलेटर की जरुरत पड़ी। सामान्य स्वस्थ व्यक्ति का बीएमआई 19 से 23.5 होती है।

मोटापे का सबसे उपयुक्त मानक

मोटापे का सबसे उपयुक्त मानक बीएमआई है। जिसे नापने का तरीका किग्रा में वजन में ऊंचाई (मीटर) के वर्ग का भाग देने से बीएमआई जाना जा सकता है।

मोटे युवाओं में रोग के गंभीर होने के कारण

इंफ्लोमेशन की अधिकता

इंसुलिन रेजिजस्टेंस की अवस्था

फेफड़ों का फुलाव व प्रसार क्षमता कम होना

साइटोकाइन स्ट्रोम की अवस्था का लम्बे समय तक रहना

उम्र के हिसाब से कहां-कितने मरीज

नए अस्पताल - 20 से 30 वर्ष उम्र के 49- 31 से 40 वर्ष उम्र के 60एसएसबी ब्लॉक - 20 से 30 वर्ष उम्र के 23- 31 से 40 वर्ष उम्र के 28

इनका यह कहना

पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक वजन वाले युवाओं में ऑक्सीजन की आवश्यकता अधिक पाई गई। साइडो काइन स्ट्रोर्म की फेज गंभीर व लम्बी पाई गई। अन्य बीमारियों की तरह ही कोविड में भी मोटापा एक महत्वपूर्ण रिस्क फेक्टर है। वजन को नियंत्रित करने के लिए खाने में मीठी व तरल हुई चीजों से परहेज करें। नियमित व्यायाम से वजन नियंत्रित किया जा सकता है।

- डॉ. मनोज सालूजा, आचार्य, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज कोटा

Abhishek Gupta
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