कोटा के एक बीएड कॉलेज में फर्जी दस्तावेज से प्रवेश देने के 31 साल पुराने मामले में 48 आरोपी बरी

कुल 56 आरोपी थे, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी, जबकि 5 आरोपी फरार घोषित हैं

By: dhirendra tanwar

Published: 10 Sep 2021, 11:53 AM IST

कोटा. पीटीईटी-1990 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को सीट आवंटन के बाद रिक्त सीटों पर कोटा के जवाहर लाल नेहरू शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय सकतपुरा में गैर कानूनी तरीके से प्रवेश देने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) क्रम संख्या-5 ने 31 साल बाद फैसला सुनाया। इसमें न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव 48 आरोपियों को बरी किया है। मामले में कुल 56 आरोपी थे, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी। जबकि 5 आरोपी फरार घोषित हैं।
बचाव पक्ष के वकील भुवनेश शर्मा ने बताया कि 16 जून 1990 को परिवादी चंदन सिंह मोगरा, उप कुलसचिव एवं प्रभारी मोहनलाल सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी उदयपुर ने कोटा एसपी को परिवाद दिया था कि कोटा के जवाहर लाल नेहरू शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय सकतपुरा में 120 सीट व अनुसूचित जाति की 6 सीट पर भरी जानी थी। कॉलेज में कुछ अभ्यर्थियों को अनियमित प्रवेश की शिकायत मिली थी। कॉलेज से रिकॉर्ड मांगा तो सामने आया कि करीब 50 अभ्यर्थियों को गैर कानूनी रूप से प्रवेश दिया गया। मोहन लाल सुखाडिय़ा कॉलेज की फर्जी लेटर पेड व कार्यालय की मोहर बना परीक्षा नियंत्रक के कूटरचित साइन कर अभ्यर्थियों को विधि विरुद्ध कॉलेज में प्रवेश दिया।
परिवाद पर कुन्हाड़ी थाने में मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने अनुसंधान के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान कराए गए। मामले में 31 साल बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या-5, नरेश सिंह ने 3 सितंबर को फैसला सुनाया।

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