जयकारों के बीच वक्रतुण्ड महाकाय की विदाई

कोटा. जोश, जुनून और भक्ति भरे माहौल में रविवार को शहरवासियों ने वक्रतुण्ड महाकाय को महाविदाई दी। नए-पुराने कोटा, पटरीपार व नदीपार क्षेत्रों में कोरोना गाइड लाइन की पालना करते हुए शोभायात्राएं निकाली गई। इनमें श्रद्धालुओं का भक्ति भाव देखने को मिला। जलाशयों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कोरोना संक्रमण के खतरे की आशंका को देखते हुए प्रशासन द्वारा तय की गई गाइड लाइन के अनुसार ही श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं को विसर्जित किया।

By: Haboo Lal Sharma

Published: 19 Sep 2021, 11:02 PM IST

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. जोश, जुनून और भक्ति भरे माहौल में रविवार को शहरवासियों ने वक्रतुण्ड महाकाय को महाविदाई दी। नए-पुराने कोटा, पटरीपार व नदीपार क्षेत्रों में कोरोना गाइड लाइन की पालना करते हुए शोभायात्राएं निकाली गई। इनमें श्रद्धालुओं का भक्ति भाव देखने को मिला। जलाशयों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कोरोना संक्रमण के खतरे की आशंका को देखते हुए प्रशासन द्वारा तय की गई गाइड लाइन के अनुसार ही श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं को विसर्जित किया।
हालांकि इस वर्ष कोरोना के खतरे की आशंका को देखते हुए नए व पुराने कोटा शहर में शोभायात्राएं निकालने की अनुमति नहीं दी गई। इसके चलते अनंत चतुर्दशी महोत्सव अयोजन समिति की ओर से सांकेतिक रूप से शोभायात्रा निकाली गई। गणपति की पूजा अर्चना के बाद सूरजपोल दरवाजे के पास से परम्परागत रूप से शोभायात्रा रवाना हुई। शोभायात्रा में गणपति की मनमोहक झांकी, भजन मंडली व डांडिया दल शामिल रहे। जैसे-जैसे यह मार्ग में आगे बढ़ती गई व श्रद्धालु व झांकियों की संख्या भी बढ़ती गई। हर कोई गणपति की भक्ति से सराबोर नजर आया। ढोल, मंजीरे झालर, भजनों की रसधार के बीच श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर नृत्य करते नजर आए। जश्न, उत्साह, उमंग व भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि मार्ग जयकारों से गुंजायमान हो गया। इस दौरान इन्द्रदेव ने भी बारिश संग गणपति व भक्तों का स्वागत किया। बरखा रानी बरसती रही और भक्ति में रमे श्रद्धालु राह पर बढ़ते रहे। इस दौरान मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा का स्वागत भी किया गया।

ये रहा शोभायात्रा का मार्ग
शोभायात्रा सूरजपोल दरवाजे से प्रारंभ होकर कैथूनीपोल, गंधीजी की पुल, श्रीपुरा, सब्जीमंडी, अग्रसेन बाजार, रामपुरा, आर्य समाज रोड होते हुए तालाब की पाल पहुंची, जहां विधि विधान के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

चहुंओर उत्साह व उमंग
सामूहिक शोभायात्रा निकालने की अनुमति के अभाव के चलते लोग अपने अपने क्षेत्रों से प्रतिमाओं को लेकर आए। कोई गजानन को वाहन में झांकी सजाकर लाया, कोई माथे पर तो कोई हाथों पर लेकर आया। किशोर सागर तालाब की पाल, भीतरियाकुंड समेत चंबल के विभिन्न तटों पर गणेश महोत्सव की रौनक नजर आई। शहर में सुबह से चतुर्दशी का अनंत उत्साह हिलौरे मारने लगा था। जयकारे लगाते प्रतिमाओं को लेकर पहुंचे। उन्होंने गणपति का पूजन व आरती कर 'अगले बरस फिर जल्दी आ Ó जैसे वादे कर विदा किया। तालाब की पाल पर बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहे। लोग प्रतिमाओं को लाते रहे और एक-एक कर प्रतिमाओं को विसर्जित करते रहे। विसर्जन के लिए नावों की भी व्यवस्था की।

बारिश ने बढ़ाया उत्साह
गणपति की विदाई में इन्द्र मेघ मल्हार गाते रहे और गणपति के भक्तों में भक्ति का ज्वार चढ़ता चला गया। सुबह से आसमां में बादल छाए हुए थे, दोपहर में अचानक बरस पड़े। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। वे जयकारों के बीच प्रतिमाओं को विसर्जित करते रहे। मौसम को देखते हुए कई लोग अपने साथ छाता लेकर आए। उन्होंने अपने साथ गणपति को भी भीगने से बचाया। शाम को भी शोभाायात्रा के दौरान मेघ मल्हार गाते रहे और श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता गया।

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