घर तक आ गए अतिक्रमण ...जिम्मेदारों को भी नहीं है परवाह.....

शहर में अतिक्रमियों के हौसले कितने बुलंद हैं, इस बात का पता परिजात कॉलोनी में देखने को मिला है।

By: Suraksha Rajora

Published: 03 Mar 2019, 01:30 PM IST

कोटा. शहर में अतिक्रमियों के हौसले कितने बुलंद हैं, इस बात का पता परिजात कॉलोनी में देखने को मिला है। इस कॉलोनी के लोगों ने अपने घरों के आगे खाली पड़ी सरकारी जगह पर करीब १० से १५ फीट तक पक्के अतिक्रमण कर दुकानें खोल ली हैं। किसी ने गार्डन तो किसी ने पार्किंग के नाम पर चारों ओर लोहे की जाली लगाकर टीनशेड डाल लिए। इस अतिक्रमण को देखते हुए कॉलोनी के सामने सड़क के दूसरी तरफ महावीर नगर तृतीय में भी मकान मालिकों ने घरों के आगे फुटपाथ से लेकर सड़क तक अतिक्रमण कर लिया है। परिजात कॉलोनी व महावीर नगर तृतीय का कुछ हिस्सा महापौर के वार्ड में आता है।पक्की दुकानें तक बना डाली|
परिजात कॉलोनी में बने मकानों के आगे करीब २० फीट जगह हाउसिंह बोर्ड की ओर से खाली छोड़ी हुई थी। कॉलोनी के लोगों ने घरों के आगे पक्के निर्माण कर या लोहे, बांस-बल्लियों के सहारे से दुकानें बना ली। इतना ही नहीं एक डेयरी मालिक ने तो खाली जगह पर पक्का निर्माण कर दुकान बना ली। इस कॉलोनी में कुछ हॉस्टल भी बने हुए हैं। इन हॉस्टल वालों ने खाली जगह पर बांस-बल्लियों से झोपडिय़ां बनाकर उनमें फास्ट फूट व अन्य दुकानें खोल ली। अतिक्रमण कर बनाई इन दुकानों के आगे सुबह-शाम वाहन खड़े होने पर जाम लग जाता है।

पार्किंग व गार्डन बनाए कुछ लोगों ने गार्डन के नाम से अतिक्रमण कर रखा है। मकान के सामने लोहे की जालियां लगाकर उनमें पेड़-पौधे लगाकर अतिक्रमण करने की होड़ मची हुई है। कुछ मकान मालिकों ने तो गाडिय़ां खड़ी करने के लिए लोहे की एंगल लगाकर चारों तरफ से कवर करते हुए टीनशेड लगाकर पार्किंग ही बना ली। ये पार्किंग इतनी बड़ी है कि इनमें दो से तीन गाडिय़ां आसानी से पार्क की जा सकती है। इसी लाइन में कॉलोनी में कई हॉस्टल संचालकों ने बड़े-बड़े जनरेटर भी सड़क पर जालियां लगाकर कवर करके रखे हुए हैं। इन अतिक्रमणों के चलते इस कॉलोनी का नाला भी अतिक्रमण से ढक गया है।

1. परिजात कॉलोनी में हॉस्टलों के आगे सड़क पर बनाई फास्ट फूड की दुकान।

2. सड़क पर पक्का निर्माण कर बनाई दुकान।

3. मकानों के आगे बना रखी पार्किंग व दुकानें।

परिजात कॉलोनी व उसके सामने महावीर नगर तृतीय वाली लाइन में हो रहे अतिक्रमणों के बारे में मैंने दो-तीन बार कमिश्नर से लेकर डिप्टी कमीश्नर को बोल दिया। एक-दो बार अतिक्रमणरोधी दस्ते के प्रभारी को भेजकर स्वयं अतिक्रमण हटाने की मुनादी भी करवाई, लेकिन निगम के पास पुलिस जाप्ता नहीं होने से कार्रवाई नहीं हो पाई।
महेश विजय, स्थानीय पार्षद व महापौर, नगर निगम

Suraksha Rajora
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