'गाय के घी से कैंसर के घाव का उपचार'

आयुर्वेद कैंसर फाउंडेशन इंदौर चेयरमैन के डॉ. अखिलेश भार्गव का दावा

 

कोटा. कैंसर रोगियों के लिए अच्छी खबर है। अब गाय के घी से भी इलाज संभव है। यह दावा है इंदौर के राजकीय अष्ट्रांग आयुर्वेदिक कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर व आयुर्वेद कैंसर फाउंडेशन इंदौर के चेयरमैन डॉ. अखिलेश भार्गव का।

शनिवार को होने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सा के राष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने पहुंचे डॉ. भार्गव का कहना है कि इंदौर के कैंसर अस्पताल के साथ मिलकर कैंसर रोगी के घाव को रोकने के लिए गाय के घी से एक दवा बनाई गई है। यह दवा कीमोथैरेपी व रेडियोथैपी के बाद होने वाले घाव में कारागर साबित हो रही है। इस दवा में गो, नींबू, त्रिफला, तरंज, पुनर्नवा, बुलेटी, ब्राह्मी औषधियों का प्रयोग किया गया है। 60 मरीजों पर इसके परीक्षण के बाद पाया गया कि इससे कैंसर रोगी के घाव भर रहे हैं।

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दुष्प्रभाव हो रहा कम

डॉ. भार्गव ने कहा कि पिछले कुछ सालों में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ी है। कीमोथैरपी, सर्जरी, रेडियाथैरेपी समेत कई इलाज पर खूब पैसा भी खर्च किया जा रहा है। इसके मुकाबले आपेक्षित परिणाम नहीं आ रहे। आयुर्वेदिक चिकित्सा व जड़ी-बूटियों के माध्यम से लगातार चिकित्सा कराने से दुष्प्रभाव कम होते हैं।

ऐसे काम करती है औषधि

डॉ. भार्गव ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधि शरीर में कमजोर कोशिकाओं पर काम करती है। यह कोशिकाओं के अंदर जाकर जीन की गड़बड़ी में सुधार का काम करती है। इस पर किए गए रिसर्च में यह पता चला है कि यह वाकई काम करती है। कैंसर में कई तरह की औषधियां है। स्वर्ण भस्म, हीरक भस्म ये सब कैंसर की कोशिकाओं को मारने का काम करती है। लोगों में भ्रांतियां है कि ये नुकसान पहुंचाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। ये कोशिकाओं के स्तर पर बनाई जाती है। स्वर्ण भस्म शरीर में जाती है तो नाइक्रो सेविल के स्तर पर काम करती है। यह कैंसर की कोशिकाओं को ही मारती है, ब्लड प्लेटलेट्स को नुकसान नहीं पहुंचाती। इसके अलावा तुलसी, अदरक, करंज समेत कई औषधियां है, जो रोगी के कैंसर को सही करने का काम करती है।


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राष्ट्रीय सेमिनार

कोटा. आयुर्वेद डॉक्टर क्लब कोटा व विश्व आयुर्वेद परिषद के तत्वावधान में 15 फरवरी को कैंसर से बचाव व उपचार विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार होगा। इसमें देशभर से आयुर्वेद डॉक्टर जुटेंगे। सेमिनार के आयोजन सचिव डॉ. निरंजन गौतम ने बताया कि उद्घाटन सत्र में राजस्थान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी जोधपुर के पूर्व कुलपति प्रो. बनवारीलाल गौड़, आयुर्वेदिक संस्थान जयपुर के पूर्व निदेशक प्रो. महेश शर्मा, आयुर्वेद कैंसर फाउंडेशन इंदौर के डॉ. अखिलेश भार्गव, अर्बुद फाउंडेशन दिल्ली से डॉ. पूजा सभरवाल, डॉ. गोपेश मंगल आएंगे।

Jaggo Chand Singh Reporting
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