समर ब्रिज क्या टूटा, घट गई अभयारण्य की आय

वन रक्षकों की कमी से भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य पहले ही सभी पर्यटकों से नाकों पर राजस्व की पूरा वसूल नहीं कर पा रहा था। अब रही सही कसर समर ब्रिज टूटने से पूरी हो गई। हालात यह है कि समर ब्रिज टूटने से अभयारण्य को पांच माह से राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। यहां से अभयारण्य को औसतन प्रतिमाह 35 हजार रुपए की राजस्व प्राप्ति होती थी।

DILIP VANVANI

December, 2010:54 AM

रावतभाटा. वन रक्षकों की कमी से भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य पहले ही सभी पर्यटकों से नाकों पर राजस्व की पूरा वसूल नहीं कर पा रहा था। अब रही सही कसर समर ब्रिज टूटने से पूरी हो गई। हालात यह है कि समर ब्रिज टूटने से अभयारण्य को पांच माह से राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। यहां से अभयारण्य को औसतन प्रतिमाह 35 हजार रुपए की राजस्व प्राप्ति होती थी।

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अभयारण्य के अधिकारियों की माने तो कि अभयारण्य में भ्रमण करने के लिए सबसे ज्यादा पर्यटक बरसात व सर्दियों ेमें आते हैं। अकेले समर ब्रिज से गुजरने वाले वाहनों से प्रतिमाह 35 हजार औसतन राजस्व की प्राप्ति होती थी। अभयारण्य घूमने जाने वाले पर्यटकों से टिकट से मिलने वाली राशि अलग से है लेकिन मध्यप्रदेश से पानी की आवक ज्यादा होने से सिंचाई विभाग ने राणा प्रताप सागर के भी गेट खोल दिए। ऐसे में समर ब्रिज पर जुलाई के आखिरी माह से ही पानी की चादर चलन लगी। अत: उक्त मार्ग से पर्यटकों का आना व जाना बंद हो गया। इसी बीच पानी के तेज बहाव के कारण समर ब्रिज टूट गया। ऐसे में पांच माह से ब्रिज से कोई नहीं भी पर्यटक नहीं आ पा रहा है। इसी के चलते ब्रिज साइड बेरियर चौकी से आने वालों से प्रतिमाह 35 हजार रुपए रुपए भी आना बंद हो गए। यानि भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य पांच माह में 1 लाख 75 हजार रुपए का घाटा झेल चुका है। अभयारण्य के अधिकारियों का कहना है कि अभयारण्य घूमने पर्यटक तो आ रहे हैं लेकिन वे रास्ता बदलकर कर आते हैं।

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यहां से भी लग रही चपल
भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य के अधीन लुहारिया, गणेशपुरा, आगरा व सेटल डेम नाके हैं। यहां पर वन रक्षकों को 24 घंटे ड्यूटी देने का नियम है, जिससे संदिग्धों पर आने व जाने वालों पर नजर रखी जा सके। साथ ही पर्यटकों से वाहनों का शुल्क भी वसूल जा सके। यहां पर अभयारण्य की ओर से 2-2 वन रक्षक तो लगा रखे हैं लेकिन उन पर गश्त करना, रेस्क्यू करना, अतिक्रमण हटाना व अवैध रूप से लकड़ी काटने वालों को रोकन सहित अन्य जिम्मेदारियां भी दे रखी हैं। उनका हर समय नाकों पर बैठना संभव नहीं है। ऐसे में सभी वाहन चालकों से शुल्क वसूला जाना संभव नहीं है। उधर अधिकारियों का कहना है वन रक्षकों के स्वीकृत 25 में से 8 पद भरे हुए हैं। सहायक वनरक्षकों के 4 में से 2 व वन पाल का एक पद स्वीकृत है लेकिन वह पद भी खाली चल रहा है।
केवल कॉक्रोडाइल पाइंट का कट पाता है टिकट
विभाग की माने तो कार्यालय पर हमेशा कोई न कोई कर्मचारी मौजूद रहता है। ऐसे में रिलोकेशन सेन्टर के अन्दर क्रॉकोइाइल पॉंइंट जो भी घूमने आता है। उन पर्यटकों से आने व जाने का शुल्क वसूल लिया जाता है। यहां पर वे आरएपीपी पॉइंट, डेम पॉइंट भी चले जाते हैं। भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभारण्य के अधीन पाडाझर खो, कलसिया महादेव, रेवाझर खो, रिझा खो भी आते हैं लेकिन यहां पर यहां से शुल्क वसूला नहीं जा पा रहा है।
इतना वसूला जाता है शुल्क
300 रुपए बस, 220 जीप, 70 रुपए ऑटो व 35 रुपए टू व्हीलर से शुल्क वसूले जाने का प्रावधान है। इसी तरह 330 रुपए प्रति विदेशी पर्यटक, 55 रुपए भारतीय पर्यटक व 25 रुपए विद्यार्थी से शुल्क वसूले जाने का प्रावधान है।
वर्जन
समर ब्रिज से गुजरने वालों से प्रतिमाह 35 हजार रुपए राजस्व की प्राप्ति होती थी लेकिन ब्रिज टूट गया है। ऐसे में पांच माह से राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही है। वन रक्षकों के पद खाली है। ऐसे में नाकों पर 24 घंटे वन रक्षकों की ड्यूटी लगाना संभव नहीं है।
दिनेश नाथ, क्षेत्रीय वन अधिकारी, भैंसरोडगढ़ वन्य जीव
अभयारण्य

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