पुस्तक ' मन मेरा गुलमोहर हुआ Ó प्रेम के अहसासों का ताजमहल

कोटा. प्रशासनिक अधिकारी व साहित्यकार टीकम चंद बोहरा 'टीकम अनजाना Óकी काव्य कृति मन मेरा गुलमोहर हुआ का शनिवार को महावीर नगर विस्तार योजना स्थित एलबीएस कैंपस में विमोचन किया गया।

 

By: Hemant Sharma

Published: 09 Jan 2021, 10:59 PM IST

कोटा. प्रशासनिक अधिकारी व साहित्यकार टीकम चंद बोहरा 'टीकम अनजाना Óकी काव्य कृति मन मेरा गुलमोहर हुआ का शनिवार को महावीर नगर विस्तार योजना स्थित एलबीएस कैंपस में विमोचन किया गया।

कार्यक्रम के वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही, भगवती प्रसाद, महेन्द नेह ,जिला कलक्टर उज्जवल राठौड़, साहित्यकार बीणा अग्रवाल ने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप मंें साहित्यकार निर्माेही ने कहा कि टीकम अनजाना की यह कृति प्रेम के अहसासों का ताज है। इसमें शामिल रचनाएं निश्चल व आत्मिक प्रेम का अहसास करवाती है।

निर्माेही ने कहा कि रचनाओं में अनजाना ने प्रेमतत्व को गहराई से जाना है और शब्दों में पिरोया है। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम ने की। उन्होंने कहा कि रचनाकार संवेदनाओं के साथ गुजरता हुआ लेखन में डूबता है तो ये संवेदनाएं व गहराई रचना में अपने आप नजर आती है। अनजाना की पुस्तक व रचनाएं भी इसी का उदाहरण है।

साहित्यकारों पर मार्गदर्शन की जिम्मेदारी

समारोह के मुख्य वक्ता साहित्यकार व अभिव्यक्ति के संपादक महेन्द्र नेह रहे। उन्होंने कहा कि अनजाना की पुस्तक में उल्लास ज्यादा है। नेह ने कहा कि प्रेम की गहराई को समझाना काफी मुश्किल होता है। आज के दौर में प्रेम की परिभाषा बदल रही है। एेसे में साहित्यकारों पर मार्गशर्दन करने की बड़ी जिम्मेदारी हो गई है। प्रेम से वेदना का संचार होता है,लेकिन अब वेदना नहीं है।हमारी संवेदनाएं कमरे में बंद हो गई है।

उन्होंने किसान आंदोलन का जिक्र किया और कहा कि सर्दी में किसान आंदोलन कर रही है, पर वेदना नहीं जाग रही। अतिथि के रूप में उपस्थित जिला कलक्टर उज्जवल राठौड़ ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ सृजन करना प्रेरणादायक है। एक लेखक आमजन की तकलीफों को बेहतरी से समझा सकता है। डॉ वीणा अग्रवाल ने भी संबोधित किया। मंच का संचालन साहित्यकार विजय जोशी ने किया।

आयोजन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की पालना की गई। कार्यक्रम में राजस्थान लेखिका साहित्य संस्था अध्यक्ष डॉ जयश्री शर्मा भी शामिल हुई। अनुकृति प्रकाशन जयपुर के निदेशक बाबू खाण्डा ने आभार व्यक्त किया। प्रारंभ में अतिथियों का प्रतीक चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

संवेदनाओं से बहती है साहित्य धारा

साहित्यकार टीमक अनजाना ने कहा कि संवेदनाओं से ही साहित्य धारा बहती है। संवेदनाएं हमेशा अच्छा करने को प्रेरित करती है। कार्यक्षेत्र में भी इस बात का अनुभव होता है। आमजन की पीड़ा को संवदनाओं से ही समझा जाता है। बोहरा की इससे पहले भी तीन कृतियां मां से प्यारा नाम नहीं,माटी हिन्दूसतान की व महाबलिदानी पन्नाधाय प्रकाशित हो चुकी है।

Hemant Sharma
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