kota University : अब विद्यार्थी तैयार करेंगे शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड

kota University : अब विद्यार्थी तैयार करेंगे शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड

Shailendra Tiwari | Publish: May, 27 2016 01:10:00 PM (IST) Kota, Rajasthan, India

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की चली तो पढ़ाई से छात्रों के संतुष्ट होने पर ही शिक्षकों को प्रमोशन मिलेगा।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की चली तो पढ़ाई से छात्रों के संतुष्ट होने पर ही शिक्षकों को प्रमोशन मिलेगा। वर्ष 2010 में लागू कॅरियर एडवांस्ड स्कीम की एकेडमिक परफारमेंस इंडेक्स (एपीआई) में यूजीसी ने तीसरी बार संशोधन किया है। 


इस आधार पर अब शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नति के लिए 60 बिंदुओं पर खरा उतरना पड़ेगा। वर्ष 2009 तक विश्वविद्यालयी और महाविद्यालयी शिक्षकों का प्रमोशन उनके कार्यकाल के आधार पर होता था। पीएचडी डिग्रीधारक शिक्षकों को पहला प्रमोशन चार साल बाद, दूसरा पांच साल बाद और तीसरा छह साल बाद नियमित तौर पर दिया जाता था। 


इसके साथ ही जिन शिक्षकों ने सिर्फ एमफिल किया था, उन्हें पहली और दूसरी पदोन्नति पांच-पांच साल बाद और तीसरी पदोन्नति छह साल बाद दी जाती थी, वहीं जिन शिक्षकों के पास पीएचडी और एमफिल की डिग्री नहीं होती थी, उनका स्केल छह-पांच और फिर छह साल बाद बढ़ाया जाता था, लेकिन वर्ष 2010 में यूजीसी ने इस प्रक्रिया को बदलकर पदोन्नति के लिए कॅरियर एडवांस्ड स्कीम लागू की। 


इसके मुताबिक तय एपीआई के आधार पर शिक्षकों का कार्यकलाप पठन-पाठन, अतिरिक्त अकादमिक गतिविधियों और शोध एवं प्रकाशन  में बांट कर सभी सेक्शन में सौ-सौ अंक प्रति वर्ष अर्जित करने पर ही सीनियर स्केल दिए जाने की व्यवस्था लागू हुई।


बढ़ जाएगा काम 

नए नियमों के अनुसार अब विवि में अस्सिटेंट प्रोफेसर के लिए 18 घंटे थ्योरी और छह घंटे ट्यूटोरियल प्रति सप्ताह अनिवार्य होगा। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 16 घंटे थ्योरी और छह घंटे ट्यूटोरियल और प्रोफेसर के लिए 14 घंटे थ्योरी और छह घंटे ट्यूटोरियल प्रति सप्ताह अनिवार्य होगा। पहले ट्यूटोरियल को भी थ्योरी का ही हिस्सा माना जाता था। इसके साथ ही अब प्रेक्टिकल का टाइम एक घंटे की बजाय दो घंटे का होगा। 


कोटा विवि की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुकृति शर्मा कहती हैं कि नए संशोधन से शिक्षकों को छह से आठ घंटे ज्यादा पढ़ाना पड़ेगा। इसका नुकसान  शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्थानों को उठाना  पड़ेगा। वर्कलोड बढऩे से शिक्षकों के पद कम हो जाएंगे। इसके चलते प्रशासनिक कार्यों से जुड़े शिक्षकों को कई-कई घंटे ज्यादा जूझना पड़ेगा। 


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छह साल में तीसरा बदलाव 

राजस्थान समेत दूसरे राज्यों के शिक्षकों ने अलग-अलग सेक्शन में मिनीमम एपीआई हासिल करने का विरोध किया तो यूजीसी ने सभी  सेक्शन में कुल 300 अंक अर्जित करने की व्यवस्था लागू कर दी, लेकिन अब तीसरी बार बदलाव कर 60 बिंदुओं वाली एपीआई जारी की है। 


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इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण छात्रों का  मूल्यांकन होगा। छात्र अपने शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके का मूल्यांकन कर उन्हें नंबर देंगे। हालांकि शिक्षकों का मूल्यांकन सिर्फ वही छात्र कर सकेंगे जिनकी कक्षाओं में उपस्थिति 70 फीसदी से ज्यादा होगी। 


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वीएमओयू शिक्षा विद्यापीठ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार कहते हैं कि इस स्थिति में शिक्षक पढ़ाई के मामले में छात्रों के साथ सख्ती नहीं कर सकेंगे, वह सारा ध्यान उन्हें साधने पर लगाएंगे। 


पहले लागू हो समानता 

शिक्षक संगठनों ने इस बदलाव का विरोध शुरू कर दिया है। रुक्टा राष्ट्रीय के विभाग सचिव डॉ. गीतराम शर्मा कहते हैं कि इससे शिक्षकों की निष्पक्षता प्रभावित होगी। साथ ही वह पढऩे-पढ़ाने पर ध्यान न देकर एपीआई के अंक बढ़ाने में लग जाएंगे। दूसरा कॅरियर एडवांस्ड स्कीम लागू करने से पहले यूजीसी राजस्थान के शिक्षकों को अतिरिक्त अकादमिक कार्य करने, सेमिनार में शामिल होने और शोध कार्य करने के समान अवसर उपलब्ध कराए।

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