आखिर क्यों हुआ इंसान मुंह ढकने को मजबूर...संत प्रभाकर ने बताया कारण

संत कबीर जयंती शनिवार को श्रद्धा से मनाई। विनोबा भावे नगर स्थित कबीर पारख संस्थान आश्रम पर लोकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए ध्वजा रोहण व बीजक पाठ किया गया।

 

By: Hemant Sharma

Published: 06 Jun 2020, 11:20 PM IST

कोटा. संत कबीर जयंती शनिवार को श्रद्धा से मनाई। विनोबा भावे नगर स्थित कबीर पारख संस्थान आश्रम पर लोकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए ध्वजा रोहण व बीजक पाठ किया गया। आश्रम के संचालक संत प्रभाकर ने साधकों को ऑनलाइन प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि कबीर की वाणी में देश व दुनिया को कठिन परिस्थितियो से निजात दिलाने का सामथ्र्य है। कबीर का मार्ग व्यक्ति को आत्मनिर्भरता व स्वावलंबन की सीख देता है।

वे भाग्यवाद के पक्षधर नही थे। प्रभाकर ने कहा कि मानव को विवेक की आंख मिली है। इसकाा उपयोग श्रेष्ठ कार्यों में किया जाए। इंसान द्वारा प्राणियो पर अत्याचार व स्वार्थ की पराकाष्ठा के प्रकृति को दंड देने को मजबूर कर दिया। यही कारण है कि इंसान को मुंह ढकने पर विवश होना पड़ रहा है। कबीर ने जीव दया का संदेश देते हुए कहा था कि ' जीव बिना जीव बांचे नाहीं जीव का जीव आधार, जीव दया कर पालिये पंडित करो विचार। Ó
उन्होंने कहा कि कबीर का चिंतन निरपेक्ष व निष्पक्ष था ।

शिक्षा में प्रारम्भ से ही कबीर की शिक्षाओं का पाठ पढ़ाया जाए तो भविष्य के झगड़ों को पैदा होने से रोका जा सकता है ।लोगो में इम्यूनिटी व ह्यूमिनिट घट रही है। यह मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाला है। इनके स्तर को सुधारने के लिऐ कबीर ने त्याग व बैराग का मार्ग बताया है।


संत गुरुबोध साहेब ने भजन से कबीर की महिमा का बखान किया। पूर्व विधायक व ट्रस्टी हीरालाल नागर ने ध्वजारोहण किया। संस्थान की ओर से जरुरत मंद लोगो को भोजन के पैकेट भी वितरित किये गए।

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