पत्नी की हत्या के आरोपी पुलिसकर्मी व परिजनों को पुलिस ने बता दिया निर्दोष, CID जांच की खबर से विभाग में मचा हड़कम्प

Rajesh Tripathi

Publish: May, 31 2019 07:59:12 PM (IST) | Updated: May, 31 2019 08:02:00 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा.बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में करीब 2 वर्ष पहले विवाहिता की मौत के मामले में पुलिस ने आरोपी पुलिसकर्मी पति व देवर, देवरानी व ननद को निर्दोष बता एफआर लगा दी थी। मृतका के पिता ने एफआर को गलत बताते हुए पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए एडीजी सिविल राइट्स को शिकायत दी थी। तथ्यों की जांच के बाद एडीजीपी सिविल राइट्स ने मामले की जांच सीआईडी सीबी को सौंप दी है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद एसपी सिटी ने न्यायालय से मामले की पत्रावली मांगने का 28 मई को प्रार्थना पत्र पेश किया। न्यायालय ने शुक्रवार को मामले की पत्रावली पुन जांच के लिए पुलिस को सौंपने के आदेश दिए।

यह था मामला

रामपुरा निवासी छीतरलाल प्रजापति ने 21 सितंबर 2017 को बोरखेड़ा थाने में रिपोर्ट दी कि उसकी पुत्री ममता कुमारी का विवाह 2010 में अर्जुनपुरा निवासी पुलिसकर्मी राकेश कुमार से हुआ था। देवर ओमप्रकाश प्रजापति व देवरानी रीता जब उसे परेशान करने लगे तो ममता और राकेश पुलिस लाइन के क्वार्टर में शिफ्ट हो गए। घटना वाले दिन ममता किसी काम से ससुराल अर्जुनपुरा गई तो आरोपियों ने ममता के हाथों की नसें काट दी तथा पंखे पर साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या का रूप दे दिया। पिता का आरोप है कि आरोपी पति बोरखेड़ा थाने में तैनात था। ऐसे में पुलिस ने उसे बचाने के लिए मामले में एफआर लगा दी।

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अधिवक्ता महेश कुमार गुप्ता व प्रमोद कुशवाह ने बताया कि मृतका के पिता ने मामले की शिकायत एडीजी सिविल राइट्स से की तथा न्यायालय में इस्तगासा प्रस्तुत कर पति, ननद, देवर, देवरानी को दोषी बताया। इस पर एडीजी सिविल राइट्स जयपुर ने एसपी सिटी को पत्र लिखकर मामले की जांच सीआईडी-सीबी को देने के आदेश देते हुए पत्रावली तलब की है।

इसलिए है मामला संदिग्ध
पिता ने बताया कि ससुराल वालों की सूचना पर वह मौके पर पहुंचा तो ममता का शव नीचे पड़ा था। उसके हाथ की नसें कटने से पूरे कमरे में खून फैला पड़ा था, लेकिन निशान ऐसे लगे कि ममता को मारने के बाद घसीटा गया हो। पंखे की एक ब्लेड से कपड़ा लटका हुआ था, जिससे परिजन फंदा लगाना बता रहे थे, लेकिन कपड़े में गांठ के निशान नहीं थे और यदि ममता फंदे से लटकी तो पंखे की ब्लेड मुड़ जानी चाहिए थी, जबकि पंखा सही था। बोरखेड़ा के तत्कालीन थानाधिकारी महावीर सिंह ने अनुसंधान में आत्महत्या मानते हुए एफआर लगा दी।

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