कोरोना से बचाव के लिए आते-जाते सैनेटाइज और समझाइश

कोटा.कोटा को शिक्षा नगरी को यूं ही शिक्षा नगरी नहीं कहा जाता है। एक ओर जहां चंबल की यह नगरी भावी डॉक्टर इंजीनियरों की पौध तैयार करने में अव्वल है, वहीं जागरूकता के मामले में भी अग्रणी है।

 

By: Hemant Sharma

Published: 17 Jun 2020, 10:41 PM IST

कोटा.कोटा को शिक्षा नगरी को यूं ही शिक्षा नगरी नहीं कहा जाता है। एक ओर जहां चंबल की यह नगरी भावी डॉक्टर इंजीनियरों की पौध तैयार करने में अव्वल है, वहीं जागरूकता के मामले में भी अग्रणी है। गत महीनों से चल रहे कोरोना वायइस के संक्रमण के दौरान शहरवासियों ने इसका उदाहरण भी पेश किया है।

यहां के समाज, सोसायटी या कोलोनी वासी हर किसी ने कोरोना से बचाव में अपनी भूमिका अदा की है। श्रीनाथपुरम क्षेत्र स्थित मल्टी पार्क व्यू में बने फ्लेट्स में रहने वाले लोग भी कोरोना को लेकर जागरूकता में आगे हैं। उन्होंने कोरोना से बचाव के जो भी तरीके हैं, उन्होंने अपनाए हैं, इसी के चलते यहां कोई परेशानी नहीं आई।

रजिस्टर में की जाती है एंट्री

पार्क के एक फ्लेट में रहने वाले नरेन्द्र सचदेवा बताते हैं कि परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को आते व जाते समय सैनेटाइगर करते हैं। इसके लिए प्रवेश द्वार पर व्यवस्था की गई है। यहां गार्ड को शरीर का तापमान नापने की मशीन उपलब्ध करवाई गई है। इससे जो भी कोई आता है, उसका तापमान लेते हैं। यहीं के रहवासी मुकेश चंदेल व अन्य ने बताया कि सभी फ्लैट्स में रहने वाली काफी जागरूक हैं।

आने जाने वाले लोंगों के तापमान लेने के साथ कोई नया व्यक्ति आता है तो उसकी भी पूरी जानकारी लेते हैं। रजिस्टर में एंट्री की जाती है। गार्ड करण सिंह ने बताया कि हम सभी कोरोना को लेकर पूरी सावधानी रख रहे हैं।

बच्चों व बुजर्गों का रखा खयाल

लॉकडाउन के दौरान हमने बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा। किसी को अनावश्यक रूप से बाहर नहीं जाने दिया। परिसर में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखते हैं। युवाओं को भी कहते हैं कि बेवजह बाहर नहीं जाएं। भीड़ से बचें। नरेन्द्र सचदेवा व अन्य के अनुसार एक द्वार से प्रवेश व दूसरे से निकास की व्यवस्था है।

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